भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

पलामू के इस बाग में लगा है थाईलैंड का ‘नूरजहां’ आम, रेशा-रहित,...


होमताजा खबरकृषि

पलामू के इस बाग में लगा है थाईलैंड का ‘नूरजहां’ आम, रेशा-रहित, वजन 2 किलो तक

Last Updated:

Palamu Mango Cultivation: पलामू के किसान सतीश दुबे ने अपने बागान में थाईलैंड का ‘नूर जहां’ आम उगाया है. यह आम 2 किलो वजन तक का हो सकता है और इसमें रेशा नहीं होता. पलामू जैसी जगह पर जहां पानी की समस्या रहती है, वहां इस तरह का बाग लगाना अपने आप में प्रेरणादायक है.

ख़बरें फटाफट

पलामू. झारखंड के पलामू जिले में जहां एक ओर क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी में आम की कई उन्नत और दुर्लभ किस्मों का संरक्षण व शोध किया जा रहा है, वहीं जिले के एक किसान ने अपने निजी बागान में ऐसा करिश्मा कर दिखाया है, जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. इस बागान में देश-विदेश की अनेक प्रजातियों के फलदार पौधे लगे हैं. इनमें थाईलैंड का प्रसिद्ध ‘नूर जहां’ आम सबसे खास है. खास बात यह है कि पलामू में आम का सीजन लगभग समाप्त होने की कगार पर है, लेकिन इस बागान में अब भी आम के पेड़ों पर फल लगे हुए हैं.

दो किलो तक हो सकता है वजन
दरअसल, पलामू जिले के बसना गांव निवासी सतीश दुबे ने अपने 4 एकड़ के बागान में अलग-अलग तरह के पेड़-पौधे लगाए हैं. जिसमें उन्होंने थाईलैंड का नूर जहां आम लगाया है. बागान के संचालक सतीश दुबे ने लोकल18 को बताया कि उन्होंने करीब चार वर्ष पहले थाईलैंड की नूर जहां किस्म के चार पौधे लगाए थे. इनमें से एक पौधा नष्ट हो गया, जबकि तीन पौधे आज भी स्वस्थ हैं और नियमित रूप से फल दे रहे हैं.

इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता इसका बड़ा आकार और बेहतरीन स्वाद है. उन्होंने बताया कि एक फल का वजन लगभग दो किलोग्राम तक पहुंच सकता है. पिछले वर्ष एक फल का वजन करीब एक किलोग्राम था, जबकि इस वर्ष 800 से 900 ग्राम तक के फल तैयार हुए हैं.

जरा भी रेशा नहीं होता
उन्होंने आगे बताया कि इस आम में रेशा बिल्कुल नहीं होता, इसलिए इसे चम्मच से काटकर आसानी से खाया जा सकता है. इसका स्वाद बेहद मीठा और लाजवाब होता है. बागान में पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक तरीके से खेती की जाती है. इसके लिए गाय पालन किया गया है और गाय के गोबर से तैयार घन जीवामृत का उपयोग पौधों में किया जाता है. साल में दो बार जैविक खाद देने से पेड़ों की बढ़वार और फलों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है.

मिसाल है यह बाग
वहीं बागान घूमने आए राजहरा गांव निवासी शशिकांत पांडे ने बागान का भ्रमण कर नूर जहां आम का स्वाद चखा. उन्होंने कहा कि पलामू जैसे जल संकट वाले क्षेत्र में इस तरह का बाग विकसित करना किसी मिसाल से कम नहीं है. यहां खेती करना आसान नहीं है, फिर भी जिस मेहनत और समर्पण से इस बाग को तैयार किया गया है, वह प्रेरणादायक है.

दूसरे किसानों के लिए प्रेरणादायक
उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केवल ‘लाखी बाग’ की अवधारणा के बारे में सुना था, लेकिन उन्हें विश्वास है कि आने वाले समय में पलामू में भी ऐसा लाखों रुपये का बाग तैयार होगा. उन्होंने बाग में प्राकृतिक तरीके से तैयार नूर जहां आम के साथ-साथ जापानी आम सहित अन्य विदेशी प्रजातियों को देखकर खुशी जताई और इसे जिले के किसानों के लिए प्रेरणादायक मॉडल बताया.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top