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रात के अंधेरे और बर्फ के अंदर भी देख लेता है निसार...


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अंधेरे-बर्फ के अंदर भी देख लेता है निसार सैटेलाइट, नासा-इसरो ने जारी की फोटो

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भारत और अमेरिका के संयुक्त मिशन निसार ने पहली बार अपना वैज्ञानिक डेटा आम लोगों और रिसर्चर्स के लिए जारी कर दिया है. इस डेटा में अंटार्कटिका की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है. इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे बर्फ के बीच एक छोटी चिड़िया उड़ रही हो.

अंधेरे-बर्फ के अंदर भी देख लेता है निसार सैटेलाइट, नासा-इसरो ने जारी की फोटोZoom

नासा-इसरो ने धरती की चौंकाने वाली तस्वीरें जारी की है. इसे भारत और अमेरिका की स्पेस एजेंसियों के संयुक्त सेटेलाइट निसार से लिया गया है. ये सेटेलाइट रात के अंधेरे और बर्फ के अंदर भी देख लेता है. अपनी दोनों रडार सिस्टम से जुटाया गया डेटा अब आम जनता और वैज्ञानिकों के लिए जारी करना शुरू कर दिया है. यह सैटेलाइट हर 12 दिन में पूरी धरती की जमीन और बर्फ का चक्कर लगाकर डेटा जुटाता है.

क्यों खास है यह तस्वीर?

नासा ने जो पहली तस्वीर जारी की है, वह पूर्वी अंटार्कटिका के एक बर्फीले इलाके की है. इस इलाके में एक पहाड़ के चारों ओर बहती बर्फ का आकार ऐसा दिखाई देता है, मानो कोई हमिंगबर्ड अपने पंख फैलाकर उड़ रही हो.

दरअसल, जब ग्लेशियर पहाड़ के आसपास से गुजरता है, तो दबाव के कारण बर्फ में गहरी दरारें पड़ जाती हैं. रडार इमेज में यही दरारें हरे रंग में दिखाई देती हैं, जबकि चिकनी बर्फ मैजेंटा रंग की नजर आती है.

कैमरे से भी ज्यादा ताकतवर

निसार में लगा सिंथेटिक अपर्चर रडार आम कैमरे से कहीं ज्यादा शक्तिशाली है. यह बादलों के आर-पार और रात के अंधेरे में भी साफ तस्वीरें ले सकता है. इतना ही नहीं, यह बर्फ और जमीन की सतह के नीचे हो रहे बदलावों का भी पता लगा सकता है.

नासा के इंजीनियर सेओंगसू जियोंग ने बताया है कि यह तकनीक वैज्ञानिकों को उन चीजों को देखने में मदद करती है, जिन्हें सामान्य कैमरे कभी नहीं देख सकते.

किस काम आएगा यह डेटा?

निसार से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल कई अहम कामों में किया जाएगा.

  • ग्लेशियर और बर्फ की गतिविधियों पर नजर रखना.
  • जंगलों और दलदली क्षेत्रों की निगरानी करना.
  • भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद हुए नुकसान का आकलन करना.
  • जमीन में धीरे-धीरे हो रहे बदलावों का पता लगाना.
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझना.

हर 12 दिन में पूरी धरती की निगरानी

निसार लगभग पूरी पृथ्वी की जमीन और बर्फ से ढके इलाकों को हर 12 दिन में दो बार स्कैन करता है. यह रोजाना कई दर्जन टेराबाइट वैज्ञानिक डेटा तैयार करता है. इसमें लगा 12 मीटर चौड़ा रडार एंटीना अब तक नासा द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया सबसे बड़ा रडार रिफ्लेक्टर माना जाता है.

आखिर क्या है निसार?

निसार भारत के इसरो और अमेरिका की नासा का संयुक्त सैटेलाइट मिशन है. इसे 30 जुलाई 2025 को आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था. अब इस सैटेलाइट से जुटाया गया डेटा वैज्ञानिकों और आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है.

भारत-अमेरिका की बड़ी साझेदारी

निसार, नासा और इसरो का पहला संयुक्त सैटेलाइट मिशन है. यह दोनों देशों के बीच सालों से चल रहे अंतरिक्ष सहयोग का अहम उदाहरण माना जा रहा है. जानकारों का मानना है कि आने वाले सालों में निसार से मिलने वाला डेटा काफी काम करेगा. इसे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं और पृथ्वी पर हो रहे पर्यावरणीय बदलावों को समझने में दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए बेहद अहम साबित होगा.

About the Author

सज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor

मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. News18 App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 4 साल से अधिक का अनुभव है और फिलहाल अभी सीनियर सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले इनशॉर्ट्स औ…

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