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पलामू में अगस्त की बारिश ने बढ़ाई अरहर किसानों की चिंता, अभी करें ये उपाय

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Palamu Arhar Ki Kheti: पलामू में अगस्त में अब तक 313 मिमी बारिश हुई है. अधिक बारिश से अरहर की फसल को नुकसान का खतरा है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने किसानों को जल निकासी व फफूंदनाशक के प्रयोग की सलाह दी. साथ ही इन बातों का ध्यान रखने को भी कहा.

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पलामू. पलामू जिले में पिछले कुछ दिनों से हुई अच्छी बारिश ने किसानों को जहां राहत दी है, वहीं जरूरत से अधिक बारिश कुछ फसलों के लिए परेशानी का कारण भी बन गई है. बता दें कि पश्चिम बंगाल में बने लो-प्रेशर के प्रभाव से अगस्त महीने में जिले में करीब 313 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है. लगातार हुई बारिश का सबसे अधिक असर उन फसलों पर पड़ने की आशंका है, जिन्हें खेत में अधिक पानी जमा होने से नुकसान हो सकता है. ऐसे में किसानों को फसल बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.

अरहर की खेती से खास पहचान
बता दें कि पलामू अरहर की खेती के लिए खास पहचान रखता है. यहां के स्थानीय प्रभेद की अरहर की दाल की खुशबू और स्वाद के कारण इसकी मांग जिले के बाहर भी रहती है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में किसान अरहर की खेती करते हैं. इस वर्ष भी किसानों ने बड़े पैमाने पर अरहर की बुआई की है, लेकिन अगस्त में हुई अत्यधिक बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से अरहर की जड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और फफूंदजनित रोग का खतरा बढ़ जाता है.

इन किसानों को हो सकता है नुकसान
कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने लोकल18 को बताया कि जिन किसानों ने बुआई के समय बीज उपचार किया है और मेड़ पर अरहर की खेती की है, उनकी फसल को अत्यधिक बारिश से नुकसान अपेक्षाकृत कम होने की संभावना है. वहीं बिना बीज उपचार के और खेत के निचले हिस्से में अरहर लगाने वाले किसानों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. किसानों को खेत में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए और जल निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए.

खरपतवार की समस्या भी बढ़ सकती है
उन्होंने कहा कि बारिश के बाद अरहर के खेत में खरपतवार की समस्या भी बढ़ सकती है. ऐसे में किसान खरपतवार नियंत्रण के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार पेंडीमेथालिन का प्रयोग कर सकते हैं. वहीं लगातार बारिश के कारण फफूंदजनित रोग की आशंका को देखते हुए फफूंदनाशक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. कार्बेंडाजिम का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. मेनकोजेब या अन्य उपयुक्त फफूंदनाशक का प्रयोग भी किया जा सकता है.

जल निकासी पर भी दें ध्यान
किसानों को खेत से खरपतवार निकालने के साथ जल निकासी पर भी ध्यान देना चाहिए. अरहर की बुआई के समय पोटाश का उचित मात्रा में प्रयोग करने से पौधों की मजबूती बढ़ती है और प्रतिकूल मौसम के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि किसी भी दवा का प्रयोग फसल की स्थिति और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना बेहतर होगा.

About the Author

Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

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