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राहुल ने बताया कि वर्ष 2020 के कोविड महामारी के दौरान उनके पिता बालेश्वर यादव भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे. उस समय उन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराना पड़ा. महामारी के कठिन दौर और अस्पतालों की स्थिति को करीब से देखने के बाद राहुल ने उसी समय संकल्प लिया कि वह भविष्य में डॉक्टर बनेंगे और जरूरतमंद लोगों की सेवा करेंगे. तभी से उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने को अपना लक्ष्य बना लिया.
कोडरमा: झुमरी निवासी 19 वर्षीय राहुल कुमार ने नीट मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर अपने परिवार के साथ-साथ पूरे कोडरमा जिले का नाम रोशन किया है. बालेश्वर यादव और बलिया देवी के पुत्र राहुल ने इस परीक्षा में 595 अंक प्राप्त करते हुए ऑल इंडिया रैंक 11591 तथा ओबीसी एनसीएल श्रेणी में 5262वीं रैंक हासिल की है. राहुल की सफलता उनके वर्षों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और डॉक्टर बनने के संकल्प का परिणाम है.
रणनीति में बदलाव से 1 लाख से अधिक रैंक से सीधे पहुंचे 11 हजार रैंक पर
विशेष बातचीत में राहुल ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा कोडरमा में हुई. उन्होंने वर्ष 2023 में पीवीएसएस डीएवी पब्लिक स्कूल, कोडरमा से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद सरकारी कॉलेज में नामांकन लेने के साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा चले गए. वहां उन्होंने करीब तीन वर्षों तक नियमित अध्ययन किया और अपने लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित रहे. उन्होंने 2025 में पहली बार नीट परीक्षा दी थी. लेकिन उस समय उनकी रैंक एक लाख से अधिक आई. उन्होंने उस असफलता को निराशा नहीं बनने दिया. बल्कि अपनी कमियों का विश्लेषण किया. इसके बाद उन्होंने रिवीजन, सेल्फ स्टडी और लगातार मॉक टेस्ट पर विशेष ध्यान दिया. इसी रणनीति का परिणाम रहा कि इस बार उन्होंने बेहतर सफलता हासिल की.
कोविड महामारी के दौरान पिता के संक्रमित होने पर लिया था संकल्प
उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 के कोविड महामारी के दौरान उनके पिता बालेश्वर यादव भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे. उस समय उन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराना पड़ा. महामारी के कठिन दौर और अस्पतालों की स्थिति को करीब से देखने के बाद राहुल ने उसी समय संकल्प लिया कि वह भविष्य में डॉक्टर बनेंगे और जरूरतमंद लोगों की सेवा करेंगे. तभी से उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने को अपना लक्ष्य बना लिया.
राहुल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित अभ्यास को दिया. उन्होंने बताया कि कोटा में प्रतिदिन 5 से 6 घंटे कोचिंग क्लास करने के बाद 5 से 6 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे. उनका मानना है कि नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए मॉक टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. जितने अधिक मॉक टेस्ट दिए जाएं. परीक्षा का आत्मविश्वास और समय प्रबंधन उतना ही बेहतर होता है.
सात बच्चों को दिलाई उच्च शिक्षा
उन्होंने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सक बनना चाहते हैं ताकि हृदय रोगियों का बेहतर इलाज कर सकें और समाज की सेवा कर सकें. राहुल छह बहनों के इकलौते भाई हैं. उनकी सफलता से पूरा परिवार बेहद खुश और गौरवान्वित है. पिता बालेश्वर यादव ने बताया कि वह स्वयं केवल दूसरी कक्षा तक ही पढ़ पाए लेकिन उन्होंने हमेशा यह प्रयास किया कि उनके सभी बच्चों को उनकी इच्छा के अनुसार बेहतर शिक्षा मिले. उन्होंने खेती-बाड़ी के साथ वर्षों तक ट्रक चालक के रूप में कड़ी मेहनत की और बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. वर्तमान में उनके पास स्वयं के दो ट्रक हैं.
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