Last Updated:
यूपी के शिवभक्त रोहित कश्यप महासंकल्प पर निकले हैं. वे करीब 7000 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं. काशी से गंगाजल लेकर वे बाबाधाम पहुंच चुके हैं. अब वे पैदल ही अमरनाथ और केदारनाथ जाएंगे. इस कठिन सफर में भोलेनाथ के प्रति उनकी अटूट आस्था और हौसला देखते बन रहा है.
देवघर: कहते हैं कि जब आस्था दिल में बस जाए तो रास्तों की दूरी मायने नहीं रखती. वहीं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के रहने वाले युवा शिवभक्त रोहित कश्यप ने ऐसा संकल्प लिया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है. भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संदेश लेकर रोहित करीब 7000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर निकले हैं.इसी यात्रा के दौरान वह काशी से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल चलते हुए देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच गए.
करीब एक महीने तक लगातार पैदल चलने के बाद जब रोहित बाबाधाम पहुंचे तो उनके चेहरे पर अलग ही चमक दिखाई दे रही थी. यह चमक किसी उपलब्धि की नहीं, बल्कि उस आस्था की थी जिसने उन्हें हजारों किलोमीटर लंबी राह पर चलने का हौसला दिया. कंधों पर जल, पैरों में छाले और मन में भोलेनाथ का नाम लेकर उन्होंने बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और विश्व शांति, मानव कल्याण तथा सनातन संस्कृति की उन्नति की कामना की.
क्या कहते हैं भक्त रोहित कश्यप
लोकल 18 से रोहित ने बताया कि यह यात्रा अचानक लिया गया फैसला नहीं है. इसके पीछे वर्षों की आस्था, विश्वास और एक बड़ा उद्देश्य जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि आज सनातन संस्कृति को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है. इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने पैदल यात्रा शुरू की है. रोहित कहते हैं कि जब वह रास्ते में लोगों से मिलते हैं तो उन्हें सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और धार्मिक स्थलों के महत्व के बारे में बताते हैं.
रोहित कश्यप ने बताया कि वह 29 अप्रैल को अपने घर से निकले थे और उनकी यह यात्रा करीब छह महीने तक चलेगी. उन्होंने कहा कि इस पूरे सफर में उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कभी तेज धूप, कभी बारिश, तो कभी सुनसान रास्ते. लेकिन हर कठिनाई के बीच उन्हें ऐसा महसूस होता है कि स्वयं भोलेनाथ उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं.यही कारण है कि वह बिना रुके लगातार आगे बढ़ रहे हैं.
बाबाधाम से जगगन्नाथ पुरी की यात्रा
रोहित ने बताया कि देवघर उनके लिए बेहद खास पड़ाव था, क्योंकि बाबा बैद्यनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और यहां दर्शन करना उनके जीवन का सपना था. उन्होंने कहा कि बाबा के दरबार में पहुंचकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनकी सारी थकान पल भर में दूर हो गई हो. मंदिर में पूजा करने के बाद उन्होंने बाबा से अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने का आशीर्वाद भी मांगा.
हालांकि रोहित की यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है. बाबाधाम से आगे उनका सफर और भी लंबा और कठिन होने वाला है. यहां से वह पैदल ही जगन्नाथपुरी के लिए रवाना होंगे. भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के बाद उनका अगला पड़ाव उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग होगा. इसके बाद वह हिमालय की कठिन वादियों में स्थित अमरनाथ धाम और फिर केदारनाथ धाम तक की यात्रा भी पैदल पूरी करेंगे. यह पूरा सफर लगभग 7000 किलोमीटर का होगा.
रास्ते में लोग करते मदद
रास्ते में मिलने वाले लोगों का प्यार और सहयोग भी रोहित के लिए बड़ी ताकत बन रहा है. उन्होंने बताया कि कई जगहों पर लोग उनके रहने और खाने की व्यवस्था कर देते हैं. कुछ लोग उनकी यात्रा के बारे में सुनकर भावुक हो जाते हैं तो कुछ उनके साथ कुछ दूरी तक पैदल भी चलते हैं. यह प्रेम और सम्मान उन्हें आगे बढ़ने की नई ऊर्जा देता है. रोहित की यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह विश्वास, समर्पण, धैर्य और संकल्प की ऐसी कहानी है जो हर किसी को प्रेरित करती है. आज के समय में जब लोग छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं, तब एक युवा हजारों किलोमीटर पैदल चलकर यह संदेश दे रहा है कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और मन में विश्वास हो तो कोई भी राह कठिन नहीं होती.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.