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प्राकृतिक खेती से पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार :...




भास्कर न्यूज|गुमला कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला (विकास भारती बिशुनपुर) द्वारा प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन योजना के अंतर्गत चयनित क्लस्टर रिसोर्स पर्सन के लिए द्वितीय चरण का पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 15 से 19 जून तक आयोजित इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए सीआरपी प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। समापन समारोह के मुख्य अतिथि, जिला उद्यान पदाधिकारी, गुमला ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं है। यह पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित सीआरपी गांव स्तर पर किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। वे योजना के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि, विकास भारती बिशुनपुर के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत ने कहा कि रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए प्राकृतिक खेती समय की आवश्यकता बन गई है। मुख्य प्रशिक्षक एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. नीरज कुमार वैश्य ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक, दोनों प्रकार का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, विकास भारती के प्रतिनिधि, महिला सीआरपी, अन्य प्रतिभागी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन किसानों के सतत विकास, प्राकृतिक खेती के व्यापक प्रसार के संकल्प के साथ हुआ।



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