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बीरकेरा में ट्रांसफार्मर जला, सात जलमीनार बंद, ग्रामीणों के समक्ष पेयजल की...



भास्कर न्यूज | सिमडेगा सिमडेगा प्रखंड की बीरू पंचायत के बीरकेरा गांव में बुनियादी सुविधाओं का संकट बना हुआ है। गांव में करीब 130 परिवार रहते हैं। बिजली, पेयजल, आवागमन की दिक्कत वर्षों से चल रही है। ग्रामीणों में नाराजगी है। शनिवार को इंटक नेता दिलीप तिर्की गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से मिलकर समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में 25 केवी का ट्रांसफार्मर लगा है। क्षमता जरूरत के मुकाबले कम है। पूरे गांव में लो वोल्टेज की समस्या रहती है। शाम होते ही घरों में पर्याप्त रोशनी नहीं मिलती। बिजली से चलने वाले उपकरण काम नहीं करते। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। घरेलू काम भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि आबादी और जरूरत को देखते हुए कम से कम 100 केवीए का ट्रांसफार्मर चाहिए। गांव में पेयजल संकट भी गंभीर है। ग्रामीणों के अनुसार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने सात जलमीनार लगाए थे। सभी वर्षों से बंद पड़े हैं। ग्रामीणों ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। गर्मी में स्थिति और बिगड़ जाती है। महिलाओं और बच्चों को पीने के पानी के लिए दूर के जलस्रोतों पर जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि जलमीनार खराब होने की सूचना कई बार विभाग को दी गई। मेंटेनेंस अवधि में भी शिकायत की गई। कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला पुल लंबे समय से टूटा है। लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए तीन से चार किलोमीटर अतिरिक्त चलना पड़ता है। किसानों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। बरसात में स्थिति और भयावह हो जाती है। कई बार आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत आती है। वाहन चालकों को कई किलोमीटर घूमकर गांव पहुंचना पड़ता है। दिलीप तिर्की ने कहा कि बीरकेरा सामाजिक रूप से जागरूक और संगठित गांव है। यहां वर्ष 2009 से हर शनिवार सामूहिक बैठक होती है। हर परिवार का एक सदस्य बैठक में शामिल होता है। गांव के विकास और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा होती है। इसके बाद भी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होना चिंता का विषय है। ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद मौके से संबंधित विभागों के अधिकारियों को फोन किया। उन्होंने कहा कि 100 केवीए ट्रांसफार्मर लगाने, बंद जलमीनार चालू कराने, टूटे पुल के पुनर्निर्माण के लिए जिला प्रशासन, विद्युत विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सामने मामला उठाया जाएगा।



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