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बोकारो | दिल्ली पब्लिक स्कूल, चास ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत संचालित अपनी कौशल बोध योजना में मंगलवार को कक्षा छह और सात के विद्यार्थियों के लिए बैगलेस डे का आयोजन किया। इस दौरान विद्यार्थियों को गोविंदपुर (धनबाद) स्थित अग्र परियोजना केंद्र का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने रेशम कीट पालन (सेरीकल्चर) की पूरी प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने शहतूत की खेती, रेशम के कीटों के पालन, कोकून निर्माण और रेशम का धागा तैयार करने की प्रक्रिया के साथ इस उद्योग से जुड़े रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी प्राप्त की। विशेषज्ञों ने उन्हें सेरीकल्चर के आर्थिक और व्यावहारिक महत्व से भी अवगत कराया। प्राचार्या डॉ. मनीषा तिवारी ने कहा कि अनुभवात्मक शिक्षा बच्चों के सीखने को अधिक प्रभावी बनाती है। कौशल बोध का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ जीवनोपयोगी कौशल से भी जोड़ना है। वहीं, प्रो-वाइस चेयरमैन राजेश अग्रवाल ने कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों में नवाचार, उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करती हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन में शिक्षकों एवं समन्वयकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विद्यार्थियों ने इस भ्रमण को यादगार और ज्ञानवर्धक बताया, जबकि अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना की।
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