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Flour Mill Business: गांव हो या शहर, आटा चक्की का व्यवसाय कम जोखिम वाला और फायदेमंद बिजनेस माना जाता है. रोजमर्रा की जरूरत होने के कारण इसकी मांग कभी खत्म नहीं होती. खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग गेहूं, मक्का, चना और मसाला पिसवाने के लिए स्थानीय चक्की पर निर्भर रहते हैं. वहीं शहरों में भी पैक्ड आटा, मल्टीग्रेन आटा और मसाला पिसाई का चलन तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में बोकारो के सेक्टर 9 के सोनू गुप्ता, जो बीते 5 सालों से आटा चक्की व्यवसाय से जुड़े हैं, उन्होंने इस कारोबार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.
इसके अलावा, अगर युवा ग्राहकों को साफ-सुथरी पिसाई, सही वजन और समय पर सेवा दें, तो आटा चक्की का व्यवसाय लंबे समय तक स्थिर और लाभदायक हो सकता है. साथ ही भविष्य में हल्दी ग्राइंडर, बेसन यूनिट और सत्तू निर्माण जैसी सुविधाएं जोड़कर कारोबार को और बड़ा किया जा सकता है.
सोनू गुप्ता ने बताया कि कोई भी युवा लगभग 80 हजार से 1 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ छोटे स्तर पर आटा चक्की व्यवसाय शुरू कर सकता है. शुरुआत में 5HP मोटर वाली छोटी चक्की मशीन 50 हजार से 60 हजार रुपये तक में मिल जाती है.
इसके अलावा करीब 5 हजार रुपये की वायरिंग, 5 हजार रुपये का बिजली कनेक्शन, 5 हजार रुपये दुकान का किराया और लगभग 2 हजार रुपये वजन मापने वाली मशीन पर खर्च आता है. वहीं, जो लोग बड़े स्तर पर व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, वे 5 लाख रुपये या उससे अधिक निवेश कर बड़ा मिल और अपना खुद का ब्रांड भी तैयार कर सकते हैं.
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आटा चक्की के संचालक सोनू ने आगे बताया कि इस व्यवसाय में गेहूं और चना पिसाई की सबसे ज्यादा मांग रहती है. शुरुआत में लोग केवल पिसाई सेवा देकर भी अच्छी कमाई कर सकते हैं. रोजाना ग्राहक 25 से 50 किलो तक गेहूं पिसवाने आते हैं.
अगर प्रतिदिन 5 क्विंटल से अधिक अनाज की पिसाई होती है, तो 6 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लगभग 3000 रुपये प्रतिदिन की कमाई हो सकती है. इस हिसाब से महीने में 1 लाख से 1.80 लाख रुपये तक की कमाई संभव है.