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भारत के दबदबे से घबराया अमेरिका! ट्रंप की नई चालबाजी की ब्रह्मा...


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भारत से दबदबे से घबराया अमेरिका! ब्रह्मा चेलानी ने खोली ट्रंप की पोल

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अमेरिका ने इंडो पैसिफिक कमांड से इंडो हटाया तो सवाल उठ खड़े हुए क‍ि अमेर‍िका ये खेल क्‍यों खेल रहा है? सामर‍िक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक- ट्रंप चीन से डील और पाकिस्तान को तरजीह दे रहे, शायद वे भारत के दबदबे से डर गए हैं.

भारत से दबदबे से घबराया अमेरिका! ब्रह्मा चेलानी ने खोली ट्रंप की पोलZoom

अमेर‍िका ने इंडोपैस‍िफ‍िक कमांड का नाम बदलकर यूएस पैस‍िफ‍िक कमांड कर द‍िया.

अमेरिका रंग बदल रहा है. जिस भारत-अमेरिका दोस्ती के कसीदे पढ़े जाते थे, उसका हनीमून पीरियड अब खत्म होता दिख रहा है. अमेरिका ने एक झटके में इंडो-पैसिफिक कमांड से ‘इंडो’ शब्द ही गायब कर दिया है. लेकिन इसमें एक मैसेज भी है. ऐसा लग रहा है क‍ि अमेर‍िका भारत के दबदबे से घबरा रहा है. इसल‍िए डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ चीन से अपनी सेटिंग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भारत को दबाने के लिए एक बार फिर पाकिस्तान को खाद-पानी देने की तैयारी में हैं.कूटनीत‍िक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी और पूर्व व‍िदेश सच‍िव न‍िरुपमा राव ने इस मूव को समझाने की कोश‍िश की है.

ब्रह्मा चेलानी ने क्या कहा?

ब्रह्मा चेलानी ने एक्‍स पर ल‍िखा, पेंटागन के इंडो शब्द को हटाने और वापस यूएस पैसिफिक कमांड नाम अपनाने के फैसले, साथ ही हाल की यूएस नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में भारत का ज‍िक्र न के बराबर होने से साफ नजर आ रहा क‍ि अमेर‍िका भारत को क‍ितनी अहमियत देता है. ऐसा लगता है कि अब यह रिश्ता किसी साझी सोच पर नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से सौदेबाजी यानी लेन-देन पर टिका है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ट्रंप चीन के साथ बीच का रास्ता निकालने की कोश‍िश कर रहे हैं. इसके साथ ही, इस इलाके में किसी एक ताकत (यानी भारत) का दबदबा न बन पाए, इसे रोकने के लिए ट्रंप को एक बार फिर पाकिस्तान की उपयोगिता याद आ गई है.

पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने क्या कहा?

न‍िरुपमा राव ने एक्‍स पर ल‍िखा, मुद्दा यह है कि क्या अमेरिका अब भी भारत को इस इलाके की व्यवस्था बनाने वाला साझीदार मानता है या फिर अमेरिकी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कई मोहरों में से सिर्फ एक उपयोगी मोहरा? यह एक बिल्कुल अलग बात है. और यह पीएम मोदी के उस बयान से पूरी तरह मेल खाता है, जिसमें उन्होंने भरोसे की बात कही थी.

अगर हम हाल के कई इशारों को एक साथ देखें, तो एक बड़ी तस्वीर बनती है. ट्रंप का भारत को डेड इकॉनमी कहना. रायसीना डायलॉग में अमेरिकी अधिकारी लैंडौ की वह चेतावनी कि अमेरिका भारत के साथ चीन वाली गलती नहीं दोहराएगा. भारतीय नाविकों की मौत और अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो के साथ हुई तीखी बहस. G7 सम्मलेन में दिखा रुखापन और ठंडी तस्वीरें. पीएम मोदी का दुनिया में भरोसे की कमी होने पर जोर देना. और अब इंडो-पैसिफिक के प्रतीक को ही छोटा कर देना. इनमें से कोई भी एक बात अपने आप में रिश्ते टूटने का सबूत नहीं है. लेकिन जब इन सबको मिलाकर देखा जाता है, तो साफ पता चलता है कि भारत-अमेरिका रिश्तों का सुनहरा और जोशीला दौर अब खत्म हो रहा है. यह रिश्ता अब ज्यादा सामान्य, ज्यादा मतलब का, लेन-देन वाला और शायद काफी ज्यादा मुश्किल होने वाला है.”

भारत के लिए इसके मायने क्या हैं?

  1. एक्‍सपर्ट कह रहे क‍ि भारत को अब यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि अमेरिका उसका पक्का दोस्त है. अमेरिका भारत को सिर्फ तब तक पूछेगा, जब तक उसका फायदा है. जरूरत खत्म, तो दोस्ती खत्म.
  2. सबसे बड़ा खतरा यह है कि अमेरिका इस इलाके में भारत को बॉस नहीं बनने देना चाहता. भारत को उलझाए रखने के लिए अमेरिका फिर से पाकिस्तान को ताकत और समर्थन दे सकता है.
  3. ट्रंप चीन से लड़ने के बजाय उससे अपने व्यापारिक सौदे सेट करने में लगे हैं. अगर चीन के साथ अमेरिका की डील पक्की हो गई, तो अमेरिका को भारत की कोई खास जरूरत नहीं रह जाएगी.
  4. पीएम मोदी ने भरोसे की कमी की जो बात कही थी, वह बिल्कुल सच साबित हो रही है. भारत को अब अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी. अमेरिका के भरोसे बैठकर हम अपनी सुरक्षा खतरे में नहीं डाल सकते.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



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