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भारत-चीन पर फिर ‘टैरिफ बम’ फोड़ने जा रहा अमेरिका, अब कितना? 60...


US Tariff News: अमेरिका का कोई भरोसा नहीं. वह कब-किस पर टैरिफ बम फोड़ दे कोई नहीं जानता. जी हां, भारत संग डील पर बातचीत के बात अमेरिका टैरिफ प्रस्ताव लाने की तैयारी में है. अमेरिका अब भारत-चीन समेत 60 देशों पर टैरिफ बम फोड़ने वाला है. अमेरिका एक बार फिर भारत और चीन समेत दुनिया के कई बड़े व्यापारिक साझेदार देशों पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. यूएसटीआर यानी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ अपनी जांच पूरी करने के बाद एडिशनल टैरिफ यानी अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है. इस सूची में भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और कई अन्य देश शामिल हैं. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लागू न करने के आरोप में भारत सहित 60 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है.

यह प्रस्ताव उन जांच के बाद सामने आया है, जो अमेरिका ने 60 देशों के खिलाफ इस आधार पर शुरू की थीं कि वे बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में असफल रहे हैं. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीएस) जैमीसन ग्रीर ने एक बयान में कहा, ‘हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में विफल रहना अस्वीकार्य है. इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है, जिसमें अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है. हम अब इस असमानता को बर्दाश्त नहीं करेंगे.’

अमेरिका का आरोप है कि इन देशों ने अपने यहां फोर्स्ड लेबर यानी जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं. इसी आधार पर अमेरिकी प्रशासन ने सेक्शन 301 (Section 301) के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव दिया है. वहीं, भारत ने बंधुआ मजदूरी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका से इन जांचों को समाप्त करने की मांग की है. भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के ढांचे के भीतर किया जाना चाहिए.

भारत-चीन पर टैरिफ बम
USTR की रिपोर्ट के अनुसार भारत उन देशों में शामिल है जिन पर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है. चीन भी इसी श्रेणी में है. वहीं कुछ देशों पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही गई है. हालांकि यह अभी अंतिम फैसला नहीं है. अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक राय मांगी है और जुलाई में सुनवाई भी होगी. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने एक बयान में कहा कि भारत, चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब सहित 54 देशों ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता दिखाई है.

पाकिस्तान का नाम भी शामिल
USTR के बयान के अनुसार, छह अर्थव्यवस्थाएं – कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मेक्सिको और पाकिस्तान- ऐसी हैं, जिन्होंने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध तो लगाया है, लेकिन उसे प्रभावी रूप से लागू नहीं कर पाई हैं. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने प्रस्ताव दिया है कि जिन अर्थव्यवस्थाओं ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया है या जिन्होंने पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत ऐसा प्रतिबंध लगाने और लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है अथवा जिन्होंने कुछ विशेष प्रकार की ऐसी वस्तुओं के आयात को रोकने वाली आंशिक व्यवस्था लागू की है, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए.

भारत पर कितना ए़डिशनल टैरिफ
बयान में कहा गया है कि अन्य सभी अर्थव्यवस्थाओं के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की दर प्रस्तावित की है. यह 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क उन 54 देशों पर लागू होगा, जिनमें भारत भी शामिल है. यूएसटीआर ने वस्त्र क्षेत्र के लिए एक विशेष तंत्र का भी प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत कुछ देशों से अमेरिका में आयात किए जाने वाले परिधानों और वस्त्रों की एक निर्धारित मात्रा को कम शुल्क दर पर प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है. उसने इच्छुक पक्षों से 22 जून तक सुनवाई में शामिल होने के लिए आवेदन और अपने बयान का सार प्रस्तुत करने को कहा है. साथ ही छह जुलाई तक लिखित टिप्पणियां भी मांगी गई हैं. यूएसटीआर इन प्रस्तावित कार्रवाइयों पर सात जुलाई को सुनवाई करेगा.

अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया?
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जबरन श्रम से बने उत्पाद कम लागत पर बाजार में आते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों और श्रमिकों को नुकसान होता है. इसी वजह से अमेरिका उन देशों पर दबाव बनाना चाहता है जो ऐसे उत्पादों के आयात को रोकने में पर्याप्त सख्ती नहीं दिखा रहे हैं.



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