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मनरेगा, जेएसएलपीएसऔर किसान उत्पादक कंपनियों का एक अनूठा समन्वय स्थापित किया गया




भास्कर न्यूज | कोडरमा एक समय था जब मरकच्चो प्रखंड के कई किसान बारिश पर निर्भर खेती और सीमित आमदनी के कारण आर्थिक संकट से जूझते थे। खेतों की बड़ी जमीन खाली पड़ी रहती थी। फल उत्पादन का सपना अधूरा था। लेकिन आज वही जमीन किसानों की आर्थिक मजबूती की नई कहानी लिख रही है। मनरेगा की बिरसा हरित ग्राम योजना ने मरकच्चो के किसानों की किस्मत बदलनी शुरू कर दी है। अब यहां का आम्रपाली आम स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। यह पहली बार बड़ी मात्रा में सीधे कंपनी तक पहुंचा है। मरकच्चो प्रखंड से 50 क्विंटल आम्रपाली आम की बड़ी खेप कंपनी के लिए रवाना की गई। इसमें मरकच्चो उत्तरी पंचायत और पूरनानगर पंचायत से आम भेजे गए। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि यदि किसानों को सही योजना, तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो गांवों की तस्वीर बदली जा सकती है। बंजर जमीन से तैयार हुई कमाई की बगिया पूरनानगर पंचायत के किसान त्रिलोकी सिंह ने लगभग दो एकड़ भूमि पर आम्रपाली आम का बाग लगाया। मरकच्चो उत्तरी के किसान माहेश्वरी प्रसाद वर्मा ने लगभग चार एकड़ भूमि पर बाग लगाया। शुरुआती वर्षों में पौधों की देखभाल हुई। इंतजार भी करना पड़ा। अब बागवानी ने फल देना शुरू कर दिया है। इस वर्ष बेहतर उत्पादन हुआ। किसानों को पहली बार बड़ी मात्रा में बाजार मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में फल उत्पादकों की सबसे बड़ी समस्या बाजार की होती है। अक्सर किसान स्थानीय व्यापारियों पर निर्भर रहते हैं। इससे उन्हें उचित कीमत नहीं मिल पाती। इस बार जिला प्रशासन की पहल पर मनरेगा, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी और किसान उत्पादक कंपनी ने मिलकर किसानों को सीधे कंपनी से जोड़ा। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है। मनरेगा के तहत संचालित बिरसा हरित ग्राम योजना का उद्देश्य केवल पौधारोपण करना नहीं है। इसका लक्ष्य ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आय का स्रोत तैयार करना है। योजना के तहत किसानों को फलदार पौधे लगाने की सुविधा दी गई। उनकी देखभाल की सुविधा भी दी गई। तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया। अब यही बागवानी ग्रामीणों की आय बढ़ाने का माध्यम बन रही है। यदि इसी तरह गुणवत्ता बनाए रखी गई तो आने वाले वर्षों में “मरकच्चो का आम्रपाली आम” राज्य ही नहीं, देश के बड़े बाजारों में भी अपनी अलग पहचान बना सकता है। इससे जिले के अन्य किसान भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फलदार बागवानी की ओर आकर्षित होंगे। कोडरमा जैसे जिले में, जहां खेती की चुनौतियां हमेशा चर्चा में रहती हैं, वहां मरकच्चो की यह पहल सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बनकर सामने आई है। सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो। प्रशासन की पहल हो। किसानों की मेहनत हो। तब गांव आत्मनिर्भर बन सकते हैं।



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