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यहां की जमीन नापने में चौंक जाते हैं राजस्व अधिकारी, निकलती है...


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वरिष्ठ पत्रकार शंकर देव प्रजापति ने बताया कि लगभग सात कोस में फैले सतगावां में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. स्थानीय लोगों के लिए यह सामान्य बात है. बाहर से आने वाले लोगों के लिए यह काफी रोचक और चौंकाने वाला लगता है. उन्होंने बताया कि जब दूसरे जिले या प्रखंड से अधिकारी और कर्मचारी सतगावां में पदस्थापित होकर आते हैं तो…..

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कोडरमा: लगातार बढ़ती आबादी से देश में जमीन की मांग भी बढ़ती जा रही है. झारखंड के भी अलग-अलग इलाकों में जमीन की भारी डिमांड है. ऐसे में वहां भी जमीन की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं. यहां शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जमीन खरीदना आम लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. बात करें झारखंड के कोडरमा जिले की तो यहां सतगावां प्रखंड अपनी अनोखी भूमि माप प्रणाली के कारण पूरे झारखंड में अलग पहचान रखता है. यहां आज भी एक कट्ठा जमीन का क्षेत्रफल 8 डिसमिल माना जाता है. वहीं राज्य के अधिकांश हिस्सों में एक कट्ठा लगभग 4 डिसमिल के बराबर होता है. यदि कोई व्यक्ति दूसरे क्षेत्रों में एक कट्ठा जमीन खरीदने जितनी राशि खर्च करता है, तो सतगावां में उसी कीमत में दोगुनी जमीन मिल सकती है.

सतगावां की इस विशेष व्यवस्था के पीछे सदियों पुराना इतिहास जुड़ा हुआ है. प्रखंड के अंचल अधिकारी केशव प्रसाद चौधरी तथा वरिष्ठ पत्रकार शंकर देव प्रजापति ने बताया कि यहां जमीन की माप का पैमाना राजा टिकैत सिंह के शासनकाल से चला आ रहा है. उस समय पूरे सतगावां क्षेत्र में भूमि की माप के लिए 9 हाथ लंबे बांस का उपयोग किया जाता था. इसी माप के आधार पर लोगों को जमीन दी जाती थी और राजस्व संबंधी कार्य भी संपन्न होते थे. राजा के शासनकाल में जो भूमि माप प्रणाली तय की गई थी. वही परंपरा समय के साथ आगे बढ़ती रही. आज भले ही जमीन की माप आधुनिक इंच टेप और वैज्ञानिक उपकरणों से की जाती हो लेकिन, एक कट्ठा का क्षेत्रफल आज भी वही माना जाता है जो राजतंत्र के समय निर्धारित किया गया था. यही कारण है कि सतगावां का कट्ठा राज्य के अन्य हिस्सों की तुलना में दोगुना क्षेत्रफल का माना जाता है.

पदाधिकारी रह जाते हैं चकित
वरिष्ठ पत्रकार शंकर देव प्रजापति ने बताया कि लगभग सात कोस में फैले सतगावां में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. स्थानीय लोगों के लिए यह सामान्य बात है. बाहर से आने वाले लोगों के लिए यह काफी रोचक और चौंकाने वाला लगता है. उन्होंने बताया कि जब दूसरे जिले या प्रखंड से अधिकारी और कर्मचारी सतगावां में पदस्थापित होकर आते हैं तो यहां की भूमि माप प्रणाली को देखकर वह भी हैरान रह जाते हैं. हालांकि, राजस्व अभिलेख और सरकारी कार्यवाही इसी स्थानीय व्यवस्था के अनुरूप संचालित की जाती है. इससे किसी तरह की प्रशासनिक परेशानी नहीं होती.

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Rajneesh Singh

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