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Palamu Kala Pahad Unique Heritage Site: पलामू के पाटन प्रखंड में काला पहाड़ नामक जगह है जो रहस्य, रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत मेल है. इस जगह का धार्मिक महत्व भी तगड़ा है. यहां पर सावन पर विशेष पूजा होती है और मकर संक्रांति के अवसर पर खास मेला लगता है.
जहां आस्था की बात होती है वहां पौराणिक मान्यताएं अलग ही महत्व रखकी हैं. सावन का पवन महीना आने वाला है. ऐसे में लोग शिवालय में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने आते हैं. इसी क्रम में झारखंड के पलामू जिले के पाटन प्रखंड में स्थित काला पहाड़ प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और रहस्यमयी इतिहास का अद्भुत संगम है. कहते हैं करीब 52 बीघा क्षेत्र में फैला यह पहाड़ वर्षों से स्थानीय लोगों के विश्वास का केंद्र बना हुआ है. हर मौसम में यहां बड़ी संख्या में लोग प्रकृति का आनंद लेने और धार्मिक दर्शन के लिए पहुंचते हैं. सावन में यहां लोग पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं.
स्थानीय लोगों ने बताया कि काला पहाड़ का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है. मान्यता है कि कभी यहां राजा-रानी का काले पत्थरों से बना महल था, जो समय के साथ पहाड़ का रूप ले बैठा. इसी पहाड़ के नाम पर आसपास के क्षेत्र की पहचान भी बनी. लोक कथाओं के कारण यह स्थान आज भी लोगों के बीच रहस्य और आकर्षण का विषय बना हुआ है.
स्थानीय लोगों ने बताया कि काला पहाड़ की ऊंचाई पर कई प्राकृतिक गुफाएं मौजूद हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इन गुफाओं से समय-समय पर अजीब आवाजें सुनाई देती हैं. इन्हीं मान्यताओं के कारण आज तक कोई भी गुफाओं के भीतर जाने का साहस नहीं करता. यही रहस्य इस पहाड़ को और अधिक रोमांचक बनाता है.
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बता दें कि काला पहाड़ धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां प्राकृतिक स्वरूप में भगवान भोलेनाथ की पूजा होती है, जबकि ऊंचाई पर स्थित सती माता मंदिर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है. मंदिर के महंत कठिन दुबे के अनुसार वर्ष 1991 में उन्हें सपने में सती माता के दर्शन हुए, जिसके बाद यहां नियमित पूजा-अर्चना शुरू हुई. परिसर में काल भैरव, नाग माता, नवग्रह और महाकाल बाबा की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं.
हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर काला पहाड़ पर विशाल मेला लगता है. इस दौरान पलामू सहित आसपास के कई जिलों से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. धार्मिक अनुष्ठानों के साथ यह मेला स्थानीय संस्कृति और सामाजिक मेल-मिलाप का भी महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.
काला पहाड़ केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि एक शानदार पर्यटन और पिकनिक स्पॉट भी है. पहाड़ की चोटी से आसपास के गांव, खेत और हरियाली का मनोरम दृश्य दिखाई देता है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक होता है, जो पर्यटकों को लंबे समय तक याद रहता है.
बता दें कि इस पहाड़ की सबसे बड़ी खासियत इसके काले रंग के पत्थर हैं. इन चट्टानों में लौह तत्व (आयरन) की मात्रा अधिक होने के कारण इनका रंग काला दिखाई देता है. यही विशेषता इस पहाड़ की पहचान बन गई और इसी वजह से इसका नाम ‘काला पहाड़’ पड़ा. जो पर्यटन और पूजा के लिहाज से खास है.