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रांची RSS कार्यालय पर पेट्रोल बम हमला:बम हमले में शामिल दोनों आरोपी...




रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमले के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। घटना को अंजाम देने के बाद फरार हुए दोनों आरोपियों को एसआईटी ने बुधवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार, आरोपी स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस से भागने की कोशिश कर रहे थे। पहले उन्हें कोडरमा जंक्शन पर चिन्हित किया गया, लेकिन तब तक ट्रेन खुल चुकी थी। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए गया जिले के रफीगंज स्टेशन पर ट्रेन रुकवाकर दोनों को उतारा और हिरासत में लिया। फिलहाल पुलिस दोनों से गहन पूछताछ कर रही है, जिससे मामले में नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। देर रात पेट्रोल बम से हमला, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात यह पूरी घटना मंगलवार देर रात करीब 12:30 बजे की है। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, दो युवक कार से कार्यालय के पास पहुंचे और कुछ दूरी पर वाहन खड़ा कर दिया। इसके बाद वे पैदल कार्यालय परिसर तक आए और पेट्रोल से भरी कांच की बोतलों में आग लगाकर उन्हें अंदर फेंक दिया। पहली बोतल रात 12:38 बजे फेंकी गई, जबकि करीब एक मिनट बाद दूसरी बोतल भी फेंकी गई। एक बोतल छत पर गिरकर टूट गई, जिससे पेट्रोल फैल गया और आग की लपटें उठीं, लेकिन आसपास ज्वलनशील सामग्री नहीं होने के कारण आग खुद ही बुझ गई। दूसरी बोतल प्रवेश द्वार के पास गिरी, लेकिन उसमें आग नहीं लगी। बुधवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही आरएसएस कार्यकर्ता और भाजपा नेता मौके पर पहुंच गए, वहीं पुलिस-प्रशासन भी सक्रिय हो गया। एनआईए और फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य घटना की गंभीरता को देखते हुए दोपहर करीब तीन बजे एनआईए की तीन सदस्यीय टीम भी मौके पर पहुंची। टीम ने बंद कमरे में प्रांत प्रचारकों के साथ बैठक की और फिर घटनास्थल का निरीक्षण किया। छत पर जाकर टूटे हुए बोतलों के टुकड़ों की जांच की गई और नमूने एकत्र किए गए। करीब 3:50 बजे टीम वहां से लौट गई, हालांकि आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। इधर, नेता प्रतिपक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता भी कार्यालय पहुंचे और घटना की जानकारी ली। वहीं, बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने भी मौके से अहम साक्ष्य जुटाए हैं। घटना के समय दफ्तर में थे 20 लोग मौजूद संघ की ओर से इस मामले में चुटिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। शिकायत के अनुसार, घटना के समय कार्यालय परिसर में करीब 20 लोग मौजूद थे, जिनमें प्रचारक, विद्यार्थी, चालक, रसोइया और अन्य कर्मचारी शामिल थे। सभी अपने कमरों में सो रहे थे। धमाके की आवाज से उनकी नींद खुली, लेकिन तत्काल कुछ समझ नहीं आया। सुबह करीब पांच बजे छत पर जाने के दौरान हमले का पता चला। संघ के एक प्रचारक ने बताया कि यह कार्यालय 1990 से संचालित है। झारखंड में इस तरह का हमला पहली बार हुआ है। पुलिस ने मामले की जांच के लिए कई टीमों का गठन किया है। दावा किया है कि पूरे घटनाक्रम का जल्द खुलासा किया जाएगा।



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