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झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून वोटिंग है। अहमदाबाद निवासी परिमल नाथवानी के उतरने से मुकाबला रोचक बना हुआ है। राजनीतिक गलियारे में यह माना जा रहा है कि नाथवानी ‘हिसाब-किताब’ कर के ही मैदान में डटे हैं। उनके इस गणित को कांग्रेस हॉर्स ट्रेडिंग का नाम दे रही है। वहीं भाजपा इस पर चुप्पी साधे हुए है। वोटिंग से ठीक पहले सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। दो सीटों पर तीन उम्मीदवारों की मौजूदगी ने इस मुकाबले को पूरी तरह से ‘पॉलिटिकल सस्पेंस थ्रिलर’ में बदल दिया है। मैदान में सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन से झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा हैं। बैजनाथ राम की जीत तय मानी जा रही है। मुकाबला प्रणव झा और परिमल नाथवानी के बीच ही है। अंतिम 48 घंटों में चुनावी जंग अब मुद्दों से हटकर सीधे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के आरोपों पर टिक गई है। सोमवार को रांची के सियासी गलियारों में नंबर गेम से ज्यादा ‘नोट गेम’ की चर्चा रही और आंकड़ों की बाजीगरी के बीच ‘डील’ की सुगबुगाहट सुनाई दी। साफ है कि सूबे की सियासत में ‘हॉर्स’ दौड़ रहा है, देखना यह है कि इस हॉर्स को कितने सवार मिलते हैं! सत्तापक्ष का आरोप कांग्रेस: नाथवानी का डटे रहना हॉर्स ट्रेडिंग पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने हमला बोलते हुए कहा कि निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का मैदान में डटे रहना ही हॉर्स ट्रेडिंग का जीता-जागता सबूत है। जब उनके पास सिर्फ 24 वोट हैं, तो जीत के लिए जरूरी बाकी वोटों का जुगाड़ कहां से होगा? जो भी विधायक इस खेल में बिकेगा, जनता उसे सबक सिखाएगी। झामुमो: महागठबंधन के MLA एकजुट झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि इंडिया गठबंधन पूरी तरह एकजुट है। कोई हमारे विधायकों को खरीद नहीं सकता। परिमल नाथवानी एक औद्योगिक घराने से हैं, शिष्टाचार के नाते या समर्थन मांगने मुख्यमंत्री से मिल लिए तो कोई अचरज नहीं। आंकड़े हमारे पास हैं, हमलोग दोनों सीटें जीतेंगे। नाथवानी का पलटवार बोले… काम और संबंधों के दम पर उतरा नाथवानी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब मैं झारखंड से चुनाव लड़ रहा हूं। मुझे पहले भी भाजपा और आजसू का समर्थन था, आज भी है। जब भाजपा के पास अपने 24 वोट हैं, तो हॉर्स ट्रेडिंग की बात ही क्यों? झारखंड के लिए जो विकास कार्य किए हैं, उसका पूरा ब्यौरा किताब ‘झारखंड: मेरी कर्मभूमि’ में दर्ज है। विधायक दलगत भावना से ऊपर उठकर राज्य के हित में अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट करेंगे। 2008 में उन्हें गुरुजी (शिबू सोरेन) का समर्थन मिला था। भाजपा: नाथवानी की जीत सुनिश्चित है भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कहा है कि एनडीए के सभी विधायक एकजुट हैं। नाथवानी के साथ खड़े हैं। 18 जून को सभी विधायक अपने स्वविवेक और अंतरात्मा की आवाज पर वोट करेंगे। परिमल नाथवानी की जीत निश्चित है। होटल में शिफ्ट हो सकते हैं एनडीए mla इधर, एनडीए के विधायक मंगलवार शाम से रांची के मेन रोड स्थित एक होटल में शिफ्ट हो सकते हैं। होटल में ठहरने के बाद विधायकों को मतदान प्रक्रिया से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि राज्यसभा चुनाव के दौरान किसी तरह की चूक न हो। इसके बाद गुरुवार को सभी विधायक होटल से सीधे विधानसभा पहुंचकर मतदान में हिस्सा लेंगे। आज से सीएम आवास में इंडिया की बैठक इंडिया गठबंधन के सभी विधायक और प्रमुख नेता 16 और 17 जून को मुख्यमंत्री आवास में जुटेंगे। इस दौरान विधायकों से मॉक पोल भी कराया जाएगा, ताकि मतदान के दिन किसी तरह की गलती की कोई गुंजाइश न रहे। मतदान वाले दिन सभी विधायक पहले मुख्यमंत्री आवास में एकत्र होंगे। इसके बाद सभी एक साथ विधानसभा पहुंचकर मतदान में हिस्सा लेंगे। पेंच कहां फंसा है… राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 28-28 प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत होगी। इंडिया गठबंधन (झामुमो+कांग्रेस+राजद) के पास दोनों सीटें निकालने के लिए पर्याप्त बहुमत है। भाजपा के पास अपने 24 वोट हैं। ऐसे में एनडीए समर्थित नाथवानी को जीत के लिए 4 अतिरिक्त वोटों की दरकार है। यही 4 वोटों का ‘शॉर्टफॉल’ ही इस राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं और बयानों की कड़वाहट की असली वजह है। परिमल नाथवानी द्वारा ‘अंतरात्मा की आवाज’ और ‘सोरेन परिवार’ से पुराने रिश्तों की दुहाई देना, सत्तापक्ष के खेमे में सेंधमारी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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