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रिम्स शासी परिषद (गवर्निंग बॉडी) की 65वीं बैठक मंगलवार (21 जुलाई) को होगी। बैठक में संस्थान के भविष्य से जुड़े 26 महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। इस बार फोकस स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, मेडिकल शिक्षा को मजबूत करने, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद, आधारभूत संरचना के विकास और मानव संसाधन से जुड़े प्रस्तावों पर रहेगा। हालांकि 64वीं बैठक में लिए गए तीन महत्वपूर्ण एजेंडों पर कोई काम नहीं हुआ। अगली बैठक का सबसे अहम एजेंडा रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के लिए 5.89 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि से अत्याधुनिक रेडियोथेरेपी उपकरण खरीदने का है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर कैंसर मरीजों को आधुनिक उपचार की सुविधा मिलेगी और बाहर रेफर होने वाले मरीजों की संख्या कम होगी। इसके अलावा केंद्र प्रायोजित योजना के तहत यूजी, पीजी और सुपर स्पेशियलिटी सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि हाल में रिम्स में एमबीबीएस सीटें 180 से बढ़ाकर 250 कर दी गई हैं। पूर्व निदेशक के इस्तीफे समेत कई प्रशासनिक मामलों पर भी चर्चा बैठक में पूर्व निदेशक प्रो. डॉ. राजकुमार के इस्तीफे की घटनोत्तर स्वीकृति, प्रो. डॉ. डीके सिन्हा को कार्यकारी निदेशक का प्रभार दिए जाने, दैनिक मजदूरों के सेवा विस्तार, पीटीए एवं बीईआरए जांच की नई दरें तय करने, सीटीवीएस विभाग के डॉ. राकेश चौधरी से जुड़े विभागीय मामले, वित्त एवं लेखा समिति की अनुशंसाओं, लंबित न्यायालयी मामलों की पैरवी पर भी निर्णय लिया जाएगा। इन एजेंडों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर… 5.89 करोड़ रुपये की रेडियोथेरेपी मशीन की खरीद। यूजी, पीजी एवं सुपर स्पेशियलिटी सीटों में वृद्धि। 100 बेड पेइंग वार्ड के जीर्णोद्धार के लिए 4.46 करोड़ रुपये की स्वीकृति। हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में नॉन-एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट पद सृजन। एनएमसी मानकों के अनुरूप चिकित्सकों की प्रमोशन नीति। सहायक प्राध्यापक और क्लिनिकल ट्यूटर, मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति। जूनियर रेजिडेंट पद सृजन, प्रमोशन और नियुक्तियों पर भी फैसला संभव हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में नॉन-एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट (जेआर) के पद सृजित करने अथवा समायोजन के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। मंजूरी मिलने पर एमएचए करने वाले छात्र रिम्स में ही नॉन-एकेडमिक जेआर के रूप में कार्य कर सकेंगे। इसके अलावा एनएमसी मानकों के अनुरूप चिकित्सकों की प्रमोशन नीति, सहायक प्राध्यापकों, क्लिनिकल ट्यूटरों और मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति, नई सेवा नियमावली, आयुष्मान भारत और अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया जाएगा। निजी अस्पतालों से रेफर मरीजों के लिए एसओपी लागू नहीं हुई रिम्स में निजी अस्पतालों से बड़ी संख्या में मरीज रेफर किए जाने को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का प्रस्ताव भी 64वीं जीबी बैठक में स्वीकृत हुआ था। इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों के रेफरल की पारदर्शी और व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करना था, ताकि अनावश्यक रेफरल रोके जा सकें और मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। हालांकि छह माह बाद भी यह एसओपी लागू नहीं हो पाई है। क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में बहाली का मामला भी आगे नहीं बढ़ा बैठक में क्षेत्रीय नेत्र संस्थान को पूर्ण रूप से संचालित करने के लिए चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति पर भी सहमति बनी थी। वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन बैठक के बाद अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है, जिससे संस्थान में सेवाओं के विस्तार की योजना अधूरी बनी हुई है। नए ओपीडी और आईपीडी भवन निर्माण का प्रस्ताव अब भी अधूरा 64वीं गवर्निंग बॉडी बैठक में रिम्स की बढ़ती मरीज संख्या और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नए ओपीडी और आईपीडी भवन के निर्माण के प्रस्ताव पर सहमति दी गई थी। इससे मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं और विभागों में भीड़ कम करने का लक्ष्य था। हालांकि बैठक के करीब छह माह बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है और प्रस्ताव अब भी फाइलों में ही अटका हुआ है। बैठक में पीपीपी मॉडल पर नया छात्रावास बनाने के प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा। इससे मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों को बेहतर आवासीय सुविधा मिलेगी। साथ ही 100 बेड वाले पेइंग वार्ड के जीर्णोद्धार के लिए भवन निर्माण विभाग के 4.46 करोड़ रुपए के प्राक्कलन को प्रशासनिक स्वीकृति देने पर भी विचार होगा।
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