भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिले में बालू को लेकर बड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है। जिला प्रशासन की शिथिलता कहें या लापरवाही इसके बीच विकास कार्य के साथ साथ लोगों का निजी कार्य भी पीस रहा है। कंस्ट्रक्शन का कई कार्य बालू के अभाव में बंद पड़ा है या अत्यधिक मूल्य देकर बालू खरीदा जा रहा है। इस बीच 10 जुलाई से एनजीटी लगने के बाद भी बालू का अवैध खेल जारी है। अवैध रूप से अभी भी बालू का उठाव रात के अंधेरे में जारी है। रात के अंधेरे में बालू माफिया बालू का उठाव कर अलग अलग जगहों पर भेजने का काम कर रहे हैं। एनजीटी के रोग के बाद भी शहरी क्षेत्र के बीच रात में बालू गिरने का कार्य निधड़क चालू है। इस बीच बालू की मुंहमांगी कीमत 2500 से 3500 रुपया प्रति ट्रैक्टर लिया जा रहा है। लोहरदगा जिले के कोयल, शंख सहित मनहों, कैमो आदि इलाके से भी रात के अंधेरे में बालू का उठाव हो रहा है। बालू के अवैध स्टॉक को लेकर भी प्रशासन की कार्रवाई तेज है। लगातार मिल रही शिकायतों के बीच प्रशासन की कार्रवाई तो जारी है, परंतु प्रशासन से दो कदम आगे चलते हुए बालू के अवैध माफिया अब सीमावर्ती इलाकों से रात के अंधेरे में बालू का उठाव करते हैं। जिससे पुलिस प्रशासन की कार्रवाई का खतरा भी कम हो जाता है और वह आराम से बालू का अवैध कारोबार कर रहे हैं। टेंडर होने पर लोहरदगा जिले में मूल रूप से शंख और कोयल नदी से ही बालू का उठाव होता था। वर्तमान समय में ना तो एक भी वैध बालू घाट है और ना ही एक भी वैध स्टॉक यार्ड नहीं है। जिसकी वजह से पूरी तरह से बालू का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। इस खेल में निजी के अलावे सरकारी कंट्रक्शन, बिल्डिंग निर्माण, आवास निर्माण, नाली निर्माण, पीसीसी निर्माण जैसे कार्य भी अधूरे पड़े हैं। जिला प्रशासन यदि पहल करती है तो अस्थाई बालू सप्लाई का वैकल्पिक व्यवस्था कर सकती है। जिला प्रशासन या तो बालू घाट का नीलामी करें या स्टॉक के माध्यम से बालू सप्लाई कराएं। खासकर निजी आवास बनाने वाले व्यक्ति को आर्थिक नुकसान हो रहा है उन्हें सीमित पैसा में सरकारी राशि से बनने वाले आवास का कार्य पूर्ण करना पड़ रहा है। इधर रात के अंधेरे में अवैध बालू लेकर सड़कों पर सरपट दौड़ते ट्रैक्टर दुर्घटनाओं को भी आमंत्रित कर रहे है। बीते 1 सप्ताह में अवैध बालू लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से दो वाहनों को क्षति पहुंचाने का मामला भी सामने आ चुका है।
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