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वीपी सिंह के अपमान पर जब मनमोहन-टाइटलर के सामने ढाल बनकर खड़े...


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Nitish Archive George Fernandes: जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार की संयुक्त शक्ति को बताने वाली 1992 की यह संसदीय घटना केवल एक पुराने राजनीतिक विवाद की याद नहीं दिलाती, बल्कि उस दौर की राजनीति की भी तस्वीर पेश करती है जब वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक रिश्तों को सार्वजनिक रूप से निभाया जाता था. राजनीतिक आरोपों की एक कड़ी को लेकर बहस में वी.पी. सिंह के बचाव में जिस तरह से जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार का एक साथ खड़ा हो गए थे, वह भारतीय संसदीय इतिहास के उन कहानियों में शामिल है, जिन्हें आज भी राजनीतिक निष्ठा और दोस्ती की मिसाल के रूप में याद किया जाता है.

वीपी सिंह के अपमान पर जब मनमोहन-टाइटलर के सामने ढाल बन खड़े हुए नीतीश और जॉर्जZoom

जगदीश टाइटलर और मनमोहन सिंह के आरोपों पर जब संसद में वी.पी. सिंह के बचाव में एक साथ खड़े हुए थे जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार

पटना. भारतीय राजनीति में नेताओं के पाले और गठबंधन बदल लेने का अनूठा इतिहास रहा है. इस कड़ी में संसदीय इतिहास में कुछ ऐसे उदाहरण भी दर्ज हैं जिसको लेकर वैचारिक निष्ठा और दोस्ती की मिसालें दी जाती हैं. ऐसा ही एक ऐतिहासिक पकरण साल 1992 के मानसून सत्र के दौरान देश की संसद में देखा गया था. इसी से जुड़ी एक घटना सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों पर शेयर किए जा रहे हैं जो राजनीतिक गलियारों में बेहद लोकप्रिय है. यह वह दौर था जब देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर विपक्ष ने तत्कालीन पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार की ईंट से ईंट बजा दी थी. इस पूरी बहस के केंद्र में थे तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री जगदीश टाइटलर और पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह. तब लगातार हमलों के बीच तब ढाल बने थे नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस. 3 जून को दिवंगत जॉर्ज फर्नांडिस की जयंती के अवसर उनसे जुड़ा यह वाकया सोशल मीडिया में चर्चा के केंद्र में है.

क्या था 1992 का वह सियासी माजरा?

बात साल 1992 की है जब भारत का सबसे बड़ा और चर्चित ‘हर्षद मेहता शेयर बाजार घोटाला’ उजागर हुआ था. इस घोटाले ने पूरे देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली को हिलाकर रख दिया था. जून-जुलाई 1992 के दौरान जब संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ तो विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को चौतरफा घेरना शुरू किया. विपक्ष का सीधा आरोप था कि नरसिम्हा राव सरकार और उनके वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की नई उदारवादी आर्थिक नीतियों के कारण ही हर्षद मेहता जैसे सटोरियों को देश के बैंकों को लूटने की छूट मिली. सदन में नियम 193 के तहत इस विषय पर बेहद तीखी चर्चा चल रही थी.

जब वी.पी. सिंह को लपेटने लगी कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी और सरकार के मंत्रियों को समझ आ गया था कि वित्तीय अनियमितताओं के इस मामले में वे बुरी तरह घिर चुके हैं. अपनी सरकार का बचाव करने और विपक्ष के हमलों को कुंद करने के लिए कांग्रेस के रणनीतिकारों ने एक नया दांव खेला. केंद्रीय राज्य मंत्री जगदीश टाइटलर और उनके साथी सांसदों ने सदन में खड़े होकर दलील दी कि इस घोटाले की जड़ें वास्तव में 1989-90 में थीं, जब देश में जनता दल की सरकार थी और वी.पी. सिंह प्रधानमंत्री थे. कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि वी.पी. सिंह के कार्यकाल की ढिलाई की वजह से ही शेयर बाजार का यह संकट पैदा हुआ.

ढाल बनकर खड़े हुए नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस

कांग्रेस द्वारा ‘मंडल मसीहा’ वी.पी. सिंह पर कीचड़ उछाले जाने की देर थी कि संसद के भीतर जनता दल के दो सबसे आक्रामक और प्रखर समाजवादी नेता- जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार- एक साथ खड़े हो गए. जॉर्ज फर्नांडिस उस समय अपनी बेबाक वक्तृत्व शैली और धारदार तर्कों के लिए पूरे देश में विख्यात थे. जॉर्ज साहब ने सदन में खड़े होकर बेहद रौद्र रूप अख्तियार कर लिया. उन्होंने सीधे वित्त मंत्री मनमोहन सिंह और जगदीश टाइटलर की तरफ उंगली उठाते हुए कहा कि अपनी प्रशासनिक और वित्तीय नाकामियों को छिपाने के लिए एक पूर्व प्रधानमंत्री पर बेबुनियाद आरोप लगाना बेहद शर्मनाक है.





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