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राजधानी के सदर अस्पताल में साफ-सफाई और मेंटेनेंस के नाम पर हर माह करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। सफाई एजेंसी जी अलर्ट को अस्पताल के इनडोर से आउटडोर तक रोजाना तीन बार सफाई करनी है। हाई रिस्क एरिया में एक से दो घंटे के अंतराल पर सफाई की शर्त है, लेकिन एजेंसी तीन से चार घंटे के बाद सफाई कर रही है। इनडोर में टॉयलेट से लेकर वार्डों में भी पर्याप्त कर्मचारी कार्यरत नहीं हैं। इस वजह से मरीजों और परिजनों सहित डॉक्टर -नर्स को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि, एजेंसी को इनडोर में प्रति वर्गफीट दो रुपए और आउटडोर में प्रति वर्गफीट 50 पैसे की दर से भुगतान किया जा रहा है। दैनिक भास्कर ने सदर अस्पताल व एजेंसी के एग्रीमेंट की शर्तों की पड़ताल की तो पता चला सफाई एजेंसी निर्धारित मानव बल तक उपलब्ध नहीं करा रही है। टेंडर की शर्तों के अनुसार, 850 बेड वाले अस्पताल में तीनों शिफ्टों को मिलाकर करीब 350 सफाईकर्मियों की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान में एजेंसी के पास करीब 200 कर्मी ही कार्यरत हैं। सबसे खराब स्थिति अस्पताल के बेसमेंट की है। यहां कई माह से सफाई नहीं हुई। अस्पताल परिसर में फैली गंदगी मरीजों को संक्रमित कर सकती है। पांच बेड पर एक सफाईकर्मी होना चाहिए, 12 बेड पर एक कर्मी है शिफ्ट में कितना मैनपावर हर शिफ्ट में तय संख्या से कम सफाईकर्मी लगाए गए हैं टेंडर शर्तों के अनुसार – पहली शिफ्ट में प्रत्येक 5 बेड पर 1 स्टाफ, दूसरी शिफ्ट पहली शिफ्ट में नियुक्त कुल स्टाफ का 75% और तीसरी शिफ्ट पहली शिफ्ट में नियुक्त कुल स्टाफ का 50% मानव बल होना चाहिए। इस हिसाब से 850 बेडेड सदर अस्पताल में करीब 350 सफाई कर्मी होने चाहिए। हकीकत : वर्तमान में एजेंसी द्वारा करीब 190 से 200 कर्मी कार्यरत हैं। पहली शिफ्ट में 12-13 बेड पर एक स्टाफ कार्यरत हैं। इसी तरह दूसरी व तीसरी शिफ्ट में भी संख्या कम है। एजेंसी सदर अस्पताल में प्रतिदिन तीन शिफ्टों में 33.69 लाख वर्गफीट की सफाई कर रही है। इसके बदले प्रति माह करीब 70 लाख रुपए भुगतान किया जा रहा है। टेंडर की शर्त और पालन की हकीकत
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