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Ranchi Student Protest: JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले को लेकर अब दो अलग तस्वीरें सामने आई हैं. एक तरफ प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थी इसे अपनी जीत मान रहे हैं. दूसरी तरफ 2204 सफल उम्मीदवारों को लग रहा है कि वह हार गए. उनकी मेहनत और समय पर पानी फिर गया.
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ स्टूडेंट का आंदोलन.
रांचीः 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने के फैसले को लेकर नई बहस शुरू हो गई. एक तरफ परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी इसे अपनी जीत मान रहे हैं. तो दूसरी तरफ वे 2204 उम्मीदवार परेशान हैं, जिन्होंने प्रीलिम्स परीक्षा पास कर ली थी और मेंस की तैयारी में जुटे थे. किसी ने नौकरी छोड़ दी थी. किसी ने सालों तक तैयारी की थी. कोई आर्थिक मुश्किलों के बीच इस मुकाम तक पहुंचा था. अब परीक्षा रद्द होने के बाद इन अभ्यर्थियों को फिर से शुरुआत करनी पड़ सकती है.
103 पदों के लिए निकली थी भर्ती
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के लिए जनवरी में अधिसूचना जारी हुई थी. इसके जरिए 103 पदों पर नियुक्ति होनी थी. 19 अप्रैल को प्रीलिम्स परीक्षा हुई. 2 जुलाई को इसका रिजल्ट जारी किया गया. इसमें 2204 अभ्यर्थी सफल हुए. इसके बाद वे मेंस परीक्षा की तैयारी में जुट गए. मेंस परीक्षा 25 से 27 जुलाई के बीच होनी थी. लेकिन इससे पहले OMR शीट से जुड़ी कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आए. मामला बढ़ने पर मेंस परीक्षा टाल दी गई. इसके बाद 9 अगस्त को राज्य सरकार ने पूरी परीक्षा रद्द करने का फैसला कर लिया.
अजीत ने नौकरी छोड़ दी थी
हजारीबाग के रहने वाले 32 साल के अजीत कुमार ने प्रीलिम्स पास करने के बाद महाराष्ट्र में अपनी निजी नौकरी छोड़ दी थी. वह पूरी तरह मेंस परीक्षा की तैयारी करना चाहते थे. अजीत अपनी पत्नी नेहा केसरी के साथ महाराष्ट्र से झारखंड आ रहे थे. ट्रेन यात्रा के दौरान ही उन्हें मोबाइल पर परीक्षा टलने की खबर मिली. पहले उन्हें भरोसा नहीं हुआ. उन्होंने JPSC की वेबसाइट देखी. तब परीक्षा स्थगित होने की पुष्टि हुई. बाद में पूरी परीक्षा रद्द हो गई. अजीत के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा रद्द होना नहीं था. नौकरी छोड़ने के बाद अब उनके सामने भविष्य को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई.
ठेले पर सामान बेचने वाले परिवार की बेटी का सपना टूटा
माधुरी ऐंद (26) के लिए JPSC प्रीलिम्स पास करना बड़ी उपलब्धि थी. उनका परिवार रांची में ठेले पर घरेलू सामान बेचकर गुजारा करता है. माधुरी ने कोचिंग की जगह लाइब्रेरी और इंटरनेट की मदद से तैयारी की. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने 14वीं JPSC प्रीलिम्स पास कर लिया. अब परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें फिर से शुरुआत करनी होगी. माधुरी का कहना है कि इतनी मेहनत के बाद दोबारा आत्मविश्वास जुटाना आसान नहीं है.
व्हीलचेयर पर बैठकर की तैयारी
अनामिका तिवारी भी सफल अभ्यर्थियों में शामिल हैं. व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाली अनामिका के लिए परीक्षा की तैयारी और यहां तक पहुंचना आसान नहीं था. उन्होंने मेहनत कर प्रीलिम्स पास किया. लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उनके सामने भी फिर से तैयारी शुरू करने की चुनौती है.
‘गलती किसी की, सजा हमें क्यों?’
कई सफल उम्मीदवारों का सवाल है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन जिन उम्मीदवारों ने कोई गलत काम नहीं किया, उन्हें दोबारा पूरी प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़े? हजारीबाग के कुणाल प्रसाद भी यही सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि जिन्होंने कोई गलती नहीं की, उन्हें दूसरों की वजह से नुकसान नहीं होना चाहिए. 38 वर्षीय प्रदीप राम लोहरा की कहानी भी संघर्ष से भरी है. वह 2009 से सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. JPSC की भर्ती प्रक्रिया में पहले भी कानूनी विवादों के कारण उन्हें झटका लग चुका है.
नौकरी छोड़ने वाली महिलाओं की भी बढ़ी चिंता
26 वर्षीय रोशनी सिन्हा का कहना है कि अगर वह अपनी तैयारी की कमी के कारण सफल नहीं होतीं तो उन्हें स्वीकार होता. लेकिन कथित गड़बड़ी की वजह से परीक्षा रद्द होना उनके लिए अलग तरह का झटका है. दुमका की 31 वर्षीय श्वेता मरांडी ने भी जनवरी में अपनी नौकरी छोड़ दी थी. वह JPSC की तैयारी कर रही थीं. प्रीलिम्स पास होने पर वह बेहद खुश थीं. अब परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें फिर से नौकरी के दूसरे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं.
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