राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने पिछले साल हुए भयानक पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली प्रतिक्रिया का खुलासा किया है. डोभाल ने बताया कि विदेश यात्रा (सउदी अरब अरब) बीच में छोड़कर भारत लौटते ही पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर ही आपात बैठक बुलाई और भारत की ओर से कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले उनका पहला सवाल यही था— “किसने किया यह? इसके पीछे कौन जिम्मेदार है?” डिस्कवरी चैनल की आने वाली विशेष डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ (Declassified: Operation Sindoor) में दिए अपने पहले विस्तृत इंटरव्यू में एनएसए अजीत डोभाल ने भारत की रणनीति, कठोर संकल्प और 88 घंटे चले सैन्य अभियान की पूरी कहानी साझा की है.
खुफिया एजेंसियों ने खोज निकाले गुनहगार
एनएसए डोभाल के मुताबिक, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा 26 नागरिकों की हत्या किए जाने की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी विदेश यात्रा को बीच में ही विराम दिया और नई दिल्ली लौट आए. एयरपोर्ट पर जब विदेश सचिव और सुरक्षा तंत्र के शीर्ष अधिकारी उनकी अगवानी के लिए पहुंचे तो पीएम मोदी ने वहां से सीधे निकलने के बजाय एयरपोर्ट पर ही अधिकारियों के साथ बैठक की. डोभाल ने बताया:
प्रधानमंत्री वापस आए. विदेश सचिव उन्हें रिसीव करने पहुंचे थे. एयरपोर्ट पर ही हमारी बैठक हुई. सबसे पहले वह सभी तथ्य जानना चाहते थे और फिर मुझसे उनका पहला सवाल था किसने यह हरकत की है? इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
डोभाल ने कहा कि पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि भारत इस हमले के मास्टरमाइंडों की पहचान करेगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करेगा. उन्होंने बताया, “हमारी खुफिया एजेंसियों ने शानदार काम किया और बेहद कम समय में हम इस निष्कर्ष पर पहुंच गए कि इसके पीछे कौन से आतंकी संगठन और कैंप शामिल हैं.”
भारत किसी को माफ नहीं करेगा
ऑपरेशन सिंदूर की रूपरेखा और रणनीति पर बात करते हुए अजीत डोभाल ने दुनिया को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि भारत की सहनशीलता को किसी को भी उसकी कमजोरी समझने की भूल नहीं करनी चाहिए.
डोभाल ने कड़े शब्दों में कहा:
दुनिया के लिए संदेश एकदम साफ है कि भारत की उदारता या सहनशीलता को उसकी कमजोरी न माना जाए. भारत जोखिम उठा सकता है और नतीजों की परवाह किए बिना करारा प्रहार कर सकता है. चाहे वे जमीन पर हों, आसमान में हों या फिर पाताल में… वे जहां भी छिपे होंगे, हम उनका पीछा करेंगे और उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे.
ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है का क्या है मतलब?
डॉक्यूमेंट्री में एनएसए डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस चर्चित बयान की व्याख्या भी की, जिसमें उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है.
डोभाल ने स्पष्ट किया:
जब प्रधानमंत्री कहते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जिंदा है, तो उनका सीधा मकसद यह है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की यह लड़ाई तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक कि आखिरी आतंकवादी का खात्मा नहीं हो जाता.
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. यह पाकिस्तान के लिए स्पष्ट संदेश था कि भारत किसी भी आतंकी हमले को सीधे युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा.
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 6-7 मई 2025 की रात एक बड़ा और सटीक सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे कोडनेम ऑपरेशन सिंदूर दिया गया.
• 9 आतंकी कैंप तबाह: भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों और लॉन्चपैड्स को सटीक मिसाइल व एयर स्ट्राइक से ध्वस्त कर दिया.
• 88 घंटे तक चला संघर्ष: भारत की इस त्वरित कार्रवाई के बाद दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच 88 घंटे तक भारी सैन्य गतिरोध और संघर्ष चला.
• सीजफायर पर बनी सहमति: 10 मई की शाम को पाकिस्तानी सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) द्वारा भारतीय समकक्षी से संपर्क करने के बाद दोनों पक्षों के बीच गोलाबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी.
अजीत डोभाल के इस ताजा इंटरव्यू से साफ है कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक 88 घंटे की सैन्य कार्रवाई नहीं थी बल्कि यह सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में आया एक स्थाई और आक्रामक बदलाव है.