विशेष संवाददाता | रांची सिख इतिहास में गुरु अर्जन देव का बलिदान एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। उनकी शहादत के प्रमुख कारण गुरु महाराज की बढ़ती लोकप्रियता और उनके द्वारा किए जा रहे हिंदू धर्म के प्रचार से मुगल शासक जहांगीर नाखुश था। जहांगीर के विद्रोही बेटे राजकुमार खुसरो को गुरुजी द्वारा मानवीय दृष्टिकोण से आशीर्वाद देना भी एक बहाना बन गया। जहांगीर ने गुरुजी पर जुर्माना लगाया, जिसे देने से उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद यासा नियम के तहत जलती गर्म लोहे की तवी पर बिठाया गया। उनके शरीर पर उबलती रेत डाली गई और अंत में उन्हें रावी नदी के ठंडे जल में प्रवाहित कर दिया गया। स्त्री सत्संग सभा द्वारा शहादत दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को मेन रोड गुरुद्वारा में आयोजित विशेष दीवान में गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी विक्रम सिंह ने यह विचार व्यक्त किए। श्री गुरु सिंह सभा के पूर्व महासचिव प्रो. डॉ. हरमिंदर वीर सिंह ने कहा कि गुरु की शहादत सिख इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। उनके आध्यात्मिक योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। पिछले 40 दिनों से जारी श्री सुखमनी साहिब पाठ का भोग पड़ा। सहज पाठ की समाप्ति के बाद सजे दीवान में बच्ची इश्मन कौर, जपमन कौर सहित अन्य बच्चों और हजूरी रागी भाई भरपूर सिंह के जत्थे ने भावपूर्ण शबद कीर्तन किया। स्त्री सत्संग सभा की कीर्तन मंडली ने श्री अनंद साहिब का पाठ किया। इसके बाद हेड ग्रंथी ज्ञानी विक्रम सिंह ने संगत की सुख-शांति की अरदास की। सभा द्वारा पाठ में सेवा करने वाले बच्चों को उपहार देकर सम्मानित किया गया। मौके पर संगत के लिए विशेष लंगर बरताया गया। दीवान में खेम कौर, सुरिंदर कौर, परमजीत कौर सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद थे। शहादत दिवस के उपलक्ष्य में सजाए गए विशेष दीवान में उपस्थित श्रद्धालु।
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