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स्थापना समिति की बैठक, छह दिन बाद भी कर्मी स्थानां​तरित नहीं



भास्कर न्यूज | हजारीबाग हजारीबाग के चर्चित 28 करोड़ के ट्रेजरी घोटाला मामले को लेकर सरकार के आदेश को यहां के स्वास्थ्य विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। सरकार के लगातार तीन बार आदेश जारी किए जाने के बाद भी एक ही जगह तीन वर्षों से जमे कर्मियों के स्थानांतरण पर हजारीबाग स्वास्थ्य विभाग प्रबंधन गंभीर नहीं है। जबकि धनबाद जिले ने आदेश पर त्वरित अमल करते हुए दो दिनों के भीतर 31 कर्मियों का स्थानांतरण कर दिया है। 28 अप्रैल को सरकार के मुख्य सचिव ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि ट्रेजरी घोटाले की घटना के बाद सभी विभागों में कार्यरत ऐसे कर्मी, जो पिछले तीन साल से अधिक समय से एक ही पद पर जमे हैं, उनका कार्यालय स्थानांतरण तत्काल किया जाए। पुनः सरकार की संयुक्त सचिव सीमा कुमारी उदयपुरी ने 6 मई को आदेश जारी कर सभी प्रधान लिपिक, लेखापाल, और कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्यालय स्थानांतरण करने के साथ 24 घंटे के भीतर कर्मियों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य डॉ. सिद्धार्थ सान्याल ने 12 मई को आदेश जारी किया। उन्होंने 28 अप्रैल को मुख्य सचिव के आदेश पत्र को आधार बनाते हुए उक्त कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके लिए कमेटी भी बनी थी। कमेटी में हजारीबाग सिविल सर्जन की अध्यक्षता में एसीएमओ, जिला आरसीएच पदाधिकारी, जिला भीबीडी पदाधिकारी, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट बरही, और कटकमसांडी सीएचसी की डॉ. मुक्ता सोरेन को शामिल किया गया था। उन्हें तीन साल से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मियों की सूची तैयार करनी थी। स्थानांतरण के लिए नीति निर्धारण भी तैयार करना था। इसको लेकर उक्त कमेटी ने 27 जून को स्थापना की बैठक की। इसमें 20 से अधिक ऐसे कर्मी पाए गए, जिनका स्थानांतरण आवश्यक था। उनकी सूची तैयार की गई। स्थानांतरण की प्रक्रिया अब भी यथावत है। सभी कर्मी अपने-अपने स्थान पर जमे हुए हैं। इधर सीएस कार्यालय में यह भी चर्चा है कि जो कर्मी जहां जमे हैं, वे वहीं बने रहना चाहते हैं। इसके लिए वे स्थानांतरण के साथ प्रतिनियुक्ति का जुगाड़ भी लगा रहे हैं। स्थानांतरण दूसरे कार्यालय में भले कर दिया जाए। प्रतिनियुक्ति पूर्ववत रहे। इनमें कुछ गिने-चुने कर्मी भी हैं, जिन्हें पूर्ववत स्थान पर बनाए रखने के जुगाड़ में जिले के स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी भी लगे हैं। इसका बाईपास प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया को बना लिया गया है। इसका परिणाम यह है कि स्थानांतरण में विलंब हो रहा है। स्थापना की बैठक संपन्न हुए छह दिन गुजर गए। न सूची जारी की गई। न स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अभी मैं एक फैमिली मैटर में बिजी हूं। बाद में बात कर लूंगा। 20 से अधिक ऐसे कर्मी पाए गए जिनका स्थानांतरण आवश्यक था



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