भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

1500 करोड़ रुपये का हवाला कनेक्शन, आंध्रप्रदेश से सिंगापुर-हांगकांग तक फैला जाल,...


नई दिल्ली. देश की वित्तीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके तार आंध्रप्रदेश से लेकर विदेशों तक फैले हैं. केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के विशाखापत्तनम उपक्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत दिल्ली और कोलकाता में 7 प्रमुख ठिकानों पर बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया है. प्रारंभिक जांच में इस पूरे घोटाले की कुल राशि लगभग 1,500 करोड़ रुपये आंकी गई है.

इस मामले की जड़ें साल 2017 में जुड़ी हैं. ईडी ने इस मामले की जांच विशाखापत्तनम के एम.वी.पी. पुलिस स्टेशन में आयकर विभाग की शिकायत पर दर्ज एफआईआर संख्या 181/2017 के आधार पर शुरू की थी. यह मामला मुख्य रूप से वद्दी महेश और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था.

ईडी का आंध्र प्रदेश में बड़ा एक्शन

आरोपी वद्दी महेश और उसके सहयोगियों ने सोची-समझी साजिश के तहत जाली दस्तावेज तैयार किए और विभिन्न बैंकों के माध्यम से भारी-भरकम विदेशी प्रेषण भेजने के लिए इनका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया. 569 करोड़ रुपये का अवैध ट्रांसफर और शेल कंपनियों का जाल सामने आया. जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी वद्दी महेश ने अपने पिता और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर कोलकाता में पंजीकृत कार्यालयों वाली कई फर्जी कंपनियां बनाईं और उनके नाम पर बैंक खाते खोले.

ईडी ने श्रावंथी समूह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा मामला पकड़ा है.

सॉफ्टवेयर के नाम पर फर्जी इनवॉइस

इन खातों के जरिए सिंगापुर, हांगकांग और चीन की पांच कंपनियों को ‘कस्टम सॉफ्टवेयर’ खरीदने के बहाने कुल 569.03 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. बैंकों में विदेशी कंपनियों के केवल फर्जी इनवॉइस (फर्जी बिल) जमा किए गए थे, जबकि धरातल पर इन रेमिटेंस के बदले कोई भी सॉफ्टवेयर आयात नहीं किया गया था.

तस्करी, हवाला और भीमेंद्र कुमार गोयल की संलिप्तता

ईडी की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इस रैकेट में एक और बड़ा नाम भीमेंद्र कुमार गोयल का सामने आया. जांच एजेंसी के मुताबिक, भीमेंद्र कुमार गोयल एक आदतन अपराधी है, जिसे COFEPOSA के तहत तीन बार हिरासत में लिया जा चुका है. गोयल नेपाल के लिए उपलब्ध कस्टम्स ट्रांजिट डिक्लेरेशन योजना का दुरुपयोग कर रहा था और सीमा शुल्क की चोरी करके भारत में सौंदर्य प्रसाधन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कपड़ा सामग्री की बड़े पैमाने पर तस्करी कर रहा था.

हवाला के जरिए विदेशों में पैसे की लेयरिंग

भीमेंद्र कुमार गोयल ने पवन कुमार राल्ली के साथ मिलकर नई दिल्ली में फर्जी पते और जाली नामों पर मेसर्स महक ओवरसीज, मेसर्स करण ओवरसीज और मेसर्स गीत एंटरप्राइजेज जैसी फर्जी फर्मों का संचालन किया. तस्करी किए गए सामान की बिक्री से मिलने वाली काली कमाई को वैध बनाने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने के लिए गोयल ने वद्दी महेश से संपर्क किया था. वर्ष 2014 से 2017 के दौरान शेल कंपनियों के खातों में फंड मिले, जिसे गोयल के निर्देशों पर विदेशों में भेजा गया.

किन-किन देशों में फैला जाल?

ये फंड सिंगापुर और हांगकांग की निष्क्रिय या नई कंपनियों में रखे गए थे, जिनका संचालन ‘नाममात्र के निर्देशकों’ (Nominee Directors) द्वारा किया जा रहा था. इसके बाद इसे भीमेंद्र कुमार गोयल और उनके परिजनों की कंपनियों जैसे मेसर्स स्विफ्ट फॉक्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स भव टेक्नोलॉजी चाइना लिमिटेड के खातों में ट्रांसफर कर धन को सफेद दिखाया गया.

ईडी द्वारा दिल्ली और कोलकाता में चलाए गए इस व्यापक तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसी के हाथ कई अहम सबूत लगे हैं. 47 लाख रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी, 5,900 अमेरिकी डॉलर, 2,200 AED और 5,600 RMB/CNY विदेशी मुद्रा बरामद की गई है. इसके सात ही भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति के कागजात और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनका उपयोग शेल इकाइयों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और लेयरिंग करने में किया जाता था.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top