भास्कर न्यूज |गिरिडीह जिले के उच्च एवं प्लस टू विद्यालयों में स्थायी प्रधानाध्यापकों (एचएम) की भारी कमी से शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जिले के कुल 156 उच्च व प्लस टू विद्यालयों में से केवल 2 में ही स्थायी एचएम कार्यरत हैं, जबकि शेष 154 स्कूल प्रभारियों के भरोसे चल रहे हैं। स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि वर्ष 2008 के बाद से जिले में नियमित प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति नहीं हुई है। वर्तमान में कार्यरत दो स्थायी एचएम में से एक 30 जुलाई को और दूसरे अगले शैक्षणिक सत्र में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसके बाद जिले में एक भी स्थायी एचएम नहीं बचेगा। जिले के 62 प्लस टू विद्यालयों की स्थिति भी खराब है। 28 अपग्रेड हाई स्कूलों में अब तक शिक्षकों के पद स्वीकृत नहीं हुए हैं, वहीं 35 प्लस टू स्कूलों में पीजीटी शिक्षकों के पद स्वीकृत नहीं हैं। प्रभारियों को पढ़ाई के साथ वित्तीय व कार्यालयी काम भी देखना पड़ता है, जिससे पठन-पाठन प्रभावित होता है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए स्थायी एचएम की नियुक्ति बेहद जरूरी है। प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है: डीईओ जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) विनय कुमार ने बताया कि स्थायी एचएम की कमी का मामला विभाग के संज्ञान में है और इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। एचएम और शिक्षकों की नियुक्ति राज्य स्तर से होती है। जल्द नियुक्ति का प्रयास जारी है।
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