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24 जिलों के सभी थानों से जुड़ा ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’:अब देशव्यापी नेटवर्क...




छह वर्षों में झारखंड से गुम हुए 237 बच्चों का अब तक पता नहीं लगा पाई है पुलिस रांची समेत झारखंड में लापता हुए बच्चों की सुरक्षित घर वापसी के लिए पुलिस ने अब अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। सीआईडी की अगुवाई में झारखंड के सभी 24 जिलों के थानों को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ से जोड़ दिया गया है। इस हाईटेक व्यवस्था के तहत झारखंड पुलिस अब राष्ट्रीय स्तर के लापता और बरामद बच्चों के डेटाबेस से सीधे जुड़ गई है। इस देशव्यापी नेटवर्क के जरिए पुलिस अत्याधुनिक डिजिटल तरीके से बच्चों को ट्रैक कर सकेगी, जिससे उनकी पहचान और बरामदगी की प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो जाएगी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित मिशन वात्सल्य पोर्टल पर लापता और बरामद बच्चों का राष्ट्रीय स्तर का डाटाबेस उपलब्ध है। थानों के सीसीटीएनएस ऑपरेटर करेंगे मिलान
अब सभी थानों के सीसीटीएनएस ऑपरेटर किसी भी बरामद या अज्ञात बच्चे के हुलिए और विवरण का मिलान इस पोर्टल पर उपलब्ध राष्ट्रीय रिकॉर्ड से करेंगे। यह एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसमें ‘खोया-पाया’ और ‘ट्रैक चाइल्ड’ जैसी प्रणाली समाहित है। इस देशव्यापी नेटवर्क से जुड़ने के बाद अब पुलिस अत्याधुनिक तरीके से बच्चों को ट्रैक कर सकेगी, जिससे लापता बच्चों की बरामदगी की प्रक्रिया आसान होगी। गेम चेंजर साबित होगा मिशन वात्सल्य, मानव तस्करी पर लगेगी रोक
मिशन वात्सल्य पोर्टल झारखंड पुलिस के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। लापता बच्चों की तलाश में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यह पोर्टल विभिन्न राज्यों और एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया को तेज करेगा, जिससे बच्चों की जल्द पहचान और सुरक्षित बरामदगी की संभावना बढ़ेगी। इससे पुलिस की कार्यक्षमता सुधरेगी व मानव तस्करी रुकेगी।- डॉ आनंद ठाकुर, असिस्टेंट प्रोफेसर रांची विश्वविद्यालय : राज्य में 6 साल में 3025 बच्चे हुए लापता
सरकारी आंकड़े के अनुसार झारखंड में वर्ष 2020 से 2025 के बीच यानी छह वर्षों में 3025 बच्चे लापता हुए। इनमें से 2788 बच्चों को बरामद कर लिया गया, जबकि 237 बच्चों का अब तक पता नहीं चल पाया है। वर्ष 2025 में बच्चों के लापता होने के 717 मामले दर्ज हुए। वहीं रांची से जनवरी से जून तक 42 बच्चे लापता हुए हैं, जिनमें 34 को बरामद कर लिया गया है। बढ़ते मामलों को देखते हुए सीआईडी ने पोर्टल के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया है।



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