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प्रकाश मिश्र | गिरिडीह जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के दावों के बीच शवों को सुरक्षित रखने के इंतजाम बदहाल हैं। सदर अस्पताल के मातृ-शिशु केंद्र चैताडीह परिसर में करीब 25 लाख रुपए की लागत से बना मॉर्चरी हाउस पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ा है। भवन पूरी तरह तैयार है, लेकिन संचालन शुरू नहीं होने से इसका खामियाजा परिजनों और पुलिस को भुगतना पड़ रहा है। सड़क हादसों या रात में मौत होने पर शव सुरक्षित रखने की जगह नहीं होने से परिजनों को अस्पताल में स्ट्रेचर पर शव रखकर रात गुजारनी पड़ती है। वहीं, शहर के बड़े निजी अस्पतालों में भी मोर्चरी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे वहां भी मौत होने पर शवों को जैसे-तैसे रखा जाता है। जिले में सदर अस्पताल और बगोदर सीएचसी में पोस्टमार्टम की व्यवस्था तो है, लेकिन शवों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड चेंबर या डीप फ्रीजर नहीं हैं। पुलिस को अज्ञात व लावारिस शवों की शिनाख्त के लिए नियमानुसार 24 से 72 घंटे तक शव सुरक्षित रखने पड़ते हैं। ऐसे में सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में लावारिस शवों को बर्फ की सिल्लियों के बीच रखकर काम चलाया जा रहा है। मंगलवार को भी ऐसे ही दो अज्ञात शवों का निस्तारण किया गया। झाड़ियों से घिर गया है भवन, ग्रिल में लटका है ताला चैताडीह स्थित मोर्चरी हाउस के बाहर बोर्ड लगा है, लेकिन ग्रिल में ताला लटका हुआ है और चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं। निर्माण के बाद किसी अधिकारी ने इसका निरीक्षण तक नहीं किया, जिससे भवन बेकार पड़ा है। इस संबंध में सदर अस्पताल के डीएस डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि चैताडीह में मोर्चरी हाउस बने होने की जानकारी मिली है। वे जल्द भवन का निरीक्षण करेंगे और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था कर इसे चालू कराने की दिशा में पहल करेंगे।
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