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रांची नगर निगम से सेवानिवृत्त हो चुके 400 कर्मचारियों को पिछले तीन माह से पेंशन नहीं मिल रही है। निगम के अधिकारियों ने सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन में कानूनी पेंच लगा दिया है। सेवानिवृत कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए नगर आयुक्त की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी ने झारखंड म्यूनिसिपल एक्ट लागू होने के बावजूद बिहार म्यूनिसिपल ऑफिसर एंड सर्वेंट पेंशन रूल्स-1987 के पेंशन देने की अनुशंसा की है। ऐसे में पेंशन भोगियों के पेंशन में करीब 20% तक की कटौती हो जाएगी। कमेटी में शामिल अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, उप नगर आयुक्त गौतम कुमार साहू, सहायक नगर आयुक्त दिलीप कुमार, मुकेश कुमार रंजन, लेखा पदाधिकारी अमित टोप्पो ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को भी मानने से इनकार कर दिया। इधर, पेंशन नहीं मिलने से सभी पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। किसी को दवा खरीदने के लिए अपने हित-रिश्तेदारों से उधार लेना पड़ रहा है तो किसी को उधार में राशन लेना पड़ रहा है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि लंबे समय से इलाज करा रहे कर्मचारी अपने या अपने परिवार के सदस्यों का बेहतर उपचार नहीं करा पा रहे हैं। पैसे के अभाव में दो सेवानिवृत कर्मचारी पंकज यादव आैर भूवन केसरी की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद निगम अधिकारियों ने कर्मचारियों को पेंशन नहीं दी। हाईकोर्ट ने सेवानिवृत कर्मचारियों को राज्यकर्मियों के समान पेंशन देने का आदेश दिया था। लेकिन निगम ने उस आदेश को दरकिनार कर अपने स्तर से नियम की व्याख्या कर दी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। इस पर मंगलवार को सुनवाई होगी। बड़ा सवाल : 9 सालों तक करोड़ों रु. पेंशन दी, उसकी वसूली किससे होगी रांची नगर निगम के सेवानिवृत कर्मियों को वर्ष 2017 से पहले फोर्थ पे कमीशन के आधार पर काफी कम पेंशन मिलती थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नवंबर 2017 में निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त शांतनु अग्रहरि ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राज्यकर्मियों के समतुल्य पेंशन देना शुरू कर दिया। अब 9 साल तक पेंशन देने के बाद निगम के अधिकारियों ने पुराने आदेशों का हवाला देकर पेंशन में कटौती कर दी। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि पहले जिस नियम से करोड़ों रुपए पेंशन दिए गए उसकी वसूली किससे होगी? अगर राज्यकर्मियों के सामान मिल रही पेंशन सही है तो पेंशन रोकने से जिन कर्मचारियों की मौत हुई है, उसकी जवाबदेही किसकी होगी।
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