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Jamshedpur News: जमशेदपुर की खुशबू सिंह कचरे से ऐसे-ऐसे आइटम बनाती हैं कि उन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता ये कूड़ा थे. प्लास्टिक वेस्ट से सजावटी सामान और नारियल के छिलकों से चिड़ियों के घोंसले बनाकर वह पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश कर रही हैं.
जमशेदपुर. जमशेदपुर की खुशबू सिंह पर्यावरण संरक्षण की ऐसी मिसाल पेश कर रही हैं, जो लोगों को न सिर्फ स्वच्छता का संदेश दे रही हैं, बल्कि कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की प्रेरणा भी दे रही हैं. जहां अधिकांश लोग घरों से निकलने वाले प्लास्टिक और अन्य बेकार सामान को फेंक देते हैं, वहीं खुशबू सिंह एक भी प्लास्टिक या वेस्ट सामग्री को बेकार नहीं मानतीं. उनका मानना है कि सही सोच और थोड़ी रचनात्मकता से किसी भी अनुपयोगी वस्तु को आकर्षक और उपयोगी उत्पाद में बदला जा सकता है.
नहीं होगा यकीन, ये हैं कचरा
खुशबू ने अपने घर को ही ‘बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट’ की एक जीवंत प्रदर्शनी बना दिया है. उन्होंने छोटे-छोटे प्लास्टिक के टुकड़ों को इकट्ठा कर बोतलों में भरकर आकर्षक सजावटी वृक्ष तैयार किए हैं. इसके अलावा घर में मौजूद खाली प्लास्टिक और कांच की बोतलों को रंग-बिरंगे डिजाइन देकर खूबसूरत फ्लावर वास, लैंप होल्डर और कई सजावटी वस्तुओं का रूप दिया है. उनके घर में रखे उत्पादों को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि वे कभी फेंकने योग्य कचरे का हिस्सा थे.
आजकल बना रहीं पक्षियों के आशियाने
गर्मियों के मौसम में पक्षियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खुशबू सिंह इन दिनों नारियल के छिलकों से चिड़ियों के लिए घोंसले तैयार कर रही हैं. अब तक वे 150 से अधिक घोंसले बना चुकी हैं और हर दिन 3 से 4 नए घोंसले तैयार करती हैं. उनका लक्ष्य अधिक से अधिक पक्षियों को सुरक्षित और ठंडा आशियाना उपलब्ध कराना है, ताकि भीषण गर्मी में उन्हें राहत मिल सके.
नेचुरल तरीके से बनता है घोंसला
घोंसला बनाने की प्रक्रिया भी बेहद रोचक और पर्यावरण के अनुकूल है. सबसे पहले नारियल के छिलकों को अच्छी तरह साफ कर सुखाया जाता है. इसके बाद एक गुब्बारे की सहायता से उसका आकार तैयार किया जाता है और मजबूत सूत से बांधा जाता है. फिर उस पर फेविकोल और कोकोपीट की परत लगाई जाती है, जिससे घोंसला मजबूत, सुंदर और अंदर से ठंडा बना रहता है. यह प्राकृतिक संरचना चिड़ियों के रहने के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करती है.
बच्चों और युवाओं को ट्रेनिंग भी देती हैं
खुशबू सिंह केवल स्वयं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों और युवाओं को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही हैं. वे समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को सिखाती हैं कि किस प्रकार घर और आसपास के कचरे को उपयोगी वस्तुओं में बदला जा सकता है. उनका प्रयास नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है.
कचरे से भी हो सकता है पर्यावरण संरक्षण
इसके अलावा वे अपनी टीम और स्वच्छता पुकारो के साथ नदी एवं सार्वजनिक स्थानों पर सफाई अभियान भी चलाती हैं. सफाई के दौरान जो भी अनुपयोगी सामग्री मिलती है, उसे अपने साथ लाकर नए उत्पादों में बदल देती हैं. खुशबू सिंह का यह अनोखा प्रयास साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति और रचनात्मक सोच हो, तो कचरा भी पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा का सशक्त माध्यम बन सकता है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें