भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

₹18000000 करोड़ की AI मशीन, दिमाग का ‘गूगल मैप’ खोलकर ब्रेन सर्जरी,...


Last Updated:

Kanpur GSVM Medical College : उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित जीएसवीएम (GSVM) मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में चिकित्सा जगत की एक क्रांतिकारी तकनीक ‘न्यूरो नेविगेशन सिस्टम’ की शुरुआत की गई है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित करीब 1.8 करोड़ रुपये की यह अत्याधुनिक मशीन डॉक्टरों के लिए दिमाग के ‘गूगल मैप’ की तरह काम करेगी. इस तकनीक की मदद से अब ब्रेन ट्यूमर और रीढ़ की हड्डी की जटिल से जटिल सर्जरी बिना बड़े चीरे के, बेहद सटीक और सुरक्षित तरीके से की जा सकेगी. इससे न केवल स्वस्थ ऊतकों (Tissues) को नुकसान पहुंचने का खतरा खत्म होगा, बल्कि मरीजों की रिकवरी तेज होगी और कानपुर सहित आसपास के 10 जिलों के मरीजों को अब दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.

कानपुर: मेडिकल और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कानपुर से एक बेहद ऐतिहासिक और राहत वाली खबर सामने आई है. कानपुर के प्रसिद्ध जीएसवीएम (GSVM) मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में एक ऐसी जादुई और एडवांस टोक्नोलॉजी लगाई गई है, जो न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होने वाली है. डॉक्टरों को अब इंसानी दिमाग की जटिलताओं को सुलझाने के लिए ‘गूगल मैप’ मिल गया है. जी हां, अस्पताल में करीब 1.8 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से अत्याधुनिक ‘न्यूरो नेविगेशन सिस्टम’ को एक्टिवेट कर दिया गया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित यह सिस्टम डॉक्टरों को बिना भटके सीधे दिमाग और रीढ़ की हड्डी के भीतर छिपी बीमारी की सटीक लोकेशन तक पहुंचाएगा.

अभी तक पारंपरिक तरीके से होने वाली न्यूरो या ब्रेन सर्जरी में डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ट्यूमर या प्रभावित हिस्से की बिल्कुल सटीक लोकेशन खोजना होती थी. इसके लिए डॉक्टरों को मरीज के सिर का एक बड़ा हिस्सा खोलना पड़ता था और बड़ा चीरा लगाना पड़ता था. कई बार इस पूरी प्रक्रिया में न केवल अधिक समय लगता था, बल्कि ट्यूमर के आसपास मौजूद दिमाग के बेहद संवेदनशील और स्वस्थ ऊतकों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा हमेशा बना रहता था. दिमाग शरीर का सबसे नाजुक अंग है, जहां एक मिलीमीटर की चूक भी मरीज को जीवन भर के लिए अपंग बना सकती है.

कैसे काम करता है यह हाई-टेक ‘ब्रेन नेविगेटर’?

यह एआई-संचालित न्यूरो नेविगेशन सिस्टम ठीक वैसे ही काम करता है जैसे हम अनजान रास्तों पर सफर करने के लिए स्मार्टफोन में ‘गूगल मैप’ का इस्तेमाल करते हैं.

  • 3D मैपिंग: ऑपरेशन थिएटर में सबसे पहले मरीज की एमआरआई (MRI) और सीटी स्कैन (CT Scan) की डिजिटल रिपोर्ट्स को इस मशीन के कंप्यूटर सिस्टम में फीड किया जाता है.
  • सटीक रूट: यह सिस्टम पलक झपकते ही दिमाग के अंदरूनी हिस्से का एक बेहतरीन थ्री-डी (3D) डिजिटल नक्शा तैयार कर देता है.
  • गाइड की भूमिका: डॉक्टर इस स्क्रीन पर बीमारी की सटीक गहराई और रास्ता देख पाते हैं और बिना किसी भटकाव के सीधे उसी पॉइंट पर पहुंचकर सर्जरी को अंजाम देते हैं.

छोटे चीरे से बड़ी सर्जरी

सुपर स्पेशियलिटी विंग के प्रभारी डॉ. मनीष सिंह ने इस तकनीक को न्यूरो साइंस के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व क्रांति बताया है.

डॉ. मनीष सिंह का बयान, ‘यह तकनीक डॉक्टरों के लिए एक अचूक गाइड की तरह है. पहले जहां ट्यूमर तक पहुंचने के लिए सिर में बड़े-बड़े कट लगाने पड़ते थे, वहीं अब कई जटिल मामलों में बहुत छोटे से चीरे (Minimal Invasive) के जरिए ही सफल ऑपरेशन संभव हो पा रहा है. चीरा छोटा होने से मरीज को होने वाला असहनीय दर्द काफी कम हो जाता है, ऑपरेशन के दौरान खून बहना (रक्तस्राव) न्यूनतम स्तर पर आ जाता है और सबसे बड़ी बात, सर्जरी के बाद होने वाले इंफेक्शन का खतरा लगभग खत्म हो जाता है.’

सुपरफास्ट रिकवरी और जल्द छुट्टी

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस रोबोटिक और एआई तकनीक की मदद से जटिल ऑपरेशनों में लगने वाला समय घटकर लगभग आधा रह गया है. इसका सीधा फायदा मरीज को होता है, क्योंकि उसे लंबे समय तक एनेस्थीसिया के प्रभाव में नहीं रहना पड़ता. बेहतर और सटीक सर्जिकल परिणामों के कारण मरीजों की रिकवरी पहले के मुकाबले दोगुनी तेजी से हो रही है, जिससे उन्हें अस्पताल के आईसीयू और वार्ड में हफ्तों तक रुकना नहीं पड़ेगा और वे जल्द स्वस्थ होकर अपने घर लौट सकेंगे.

कानपुर समेत 10 जिलों सीधा फायदा

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की इस 1.8 करोड़ रुपये की इस महा-मशीन का लाभ केवल कानपुर शहर तक ही सीमित नहीं रहने वाला है. कानपुर मंडल और उसके आसपास के लगभग 10 से अधिक जिलों (जैसे उन्नाव, फतेहपुर, जालौन, हमीरपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज आदि) की करीब पौने दो करोड़ की आबादी को इसका सीधा फायदा मिलेगा. अब तक इन जिलों के गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को गंभीर ब्रेन ट्यूमर या स्पाइनल इंजरी के इलाज के लिए दिल्ली, लखनऊ या मुंबई जैसे महंगे शहरों की तरफ भागना पड़ता था, जिससे उनका लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च होता था. अब सरकारी दर पर यह विश्वस्तरीय इलाज कानपुर में ही सुलभ हो गया है.

About the Author

Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top