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पाकिस्‍तानी सबमरीन का बाप, भारतीय शेर के सामने मेमने की औकात –...


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INS Agray Warship: भारत अपनी सामरिक ताकत को लगातार बढ़ा रहा है. एक तरफ मॉडर्न फाइटर जेट खरीदा जा रहा है तो दूसरी तरफ देसी स्‍तर पर अत्‍याधुनिक लड़ाकू विमान डेवलप करने की प्रक्रिया चल रही है. आर्मी को मॉडर्न वॉरफेयर के लिहाज से तैयार किया जा रहा है. सेना के तीसरे अंग नेवी को भी नई टेक्‍नोलॉजी से अपडेट और अपग्रेड क‍िया जा रहा है. इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 को तीन वॉरशिप को औपचारिक तौर पर नौसेना के हवाले किया. इनमें से INS अग्रय भी एक है.

पाकिस्‍तानी सबमरीन का बाप, बंगाल की खाड़ी से हिन्‍द महासागर तक जलवाZoom

INS अग्रय को 21 जून 2026 को इंडियन नेवी को सौंपा गया. यह एक एंटी-सबमरीन वॉरशिप है. (पीएम मोदी के फेसबुक अकाउंट से साभार)

INS Agray Warship: इंडियन नेवी की ताकत दिन दूनी रात चौगनी बढ़ रही है. समंदर में भारत की ताकत को बढ़ाने की रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 को विभिन्‍न विशेषताओं से लैस 3 वॉरशिप को भारतीय नौसेना के हवाले किया. तीनों युद्धपोत का जलावतरण यानी कमिशनिंग बंगाल की खाड़ी में किया गया. सामरिक तौर पर यह अपने आप में बेहद अहम है. कुछ दिनों पहले ही पाकिस्‍तान ने चीन निर्मित हंगोर क्‍लास की पनडुब्‍बी को अपने बेड़े में शामिल किया है. इस्‍लामाबाद ने इसके साथ ही 1971 के बाद पहली बार बंगाल की खाड़ी में नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाने की इच्‍छा भी जाहिर की है. स्‍ट्रैटजिक और सिक्‍योरिटी के लिहाज से पाकिस्‍तान का यह फैसला भारत के लिए बेहद संवेदनशी है. उसके कुछ दिनों बाद ही भारत ने बंगाल की खाड़ी में 3 युद्धपोत उतार दिए. इनमें से एक कॉम्‍बैट शिप और एक सर्वे शिप है. वहीं, तीसरा युद्धपोत अपने आप में बेहद खास है. थर्ड वॉरशिप यानी INS अग्रय एंटी-सबमरीन क्षमताओं से लैस है. INS अग्रय को पनडुब्बियों का काल माना जाता है. यह स्‍वालो वॉटर यानी समंदर के उथले क्षेत्रों में सबमरीन को ढूंढ कर उसे तबाह करने में सक्षम है. INS अग्रय शिकारी तरह पनडुब्‍बी को खोज कर उसे निष्क्रिय कर सकता है.

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर भारतीय नौसेना के लिए तीन महत्वपूर्ण युद्धपोतों (INS दुनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय) को राष्ट्र को समर्पित किया. इस अवसर पर नौसेना अधिकारियों ने इन पोतों की एडवांस कॉम्‍बैट कैपेबिलिटी, स्वदेशी तकनीकों और समुद्री सुरक्षा में उनकी रणनीतिक भूमिका पर विस्तार से बताया. इन तीनों पोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता और समुद्री क्षेत्र में सामरिक बढ़त और मजबूत होने की उम्मीद है. नौसेना अधिकारियों के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म केवल आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस नहीं हैं, बल्कि इनमें बड़ी संख्या में स्वदेशी सिस्‍टम्‍स का इस्तेमाल किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की दिशा में एक अहम कदम है.

INS अग्रय क्‍यों खास

इनमें INS अग्रय को विशेष रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए तैयार किया गया है. जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर सुनील मलपोत्रा ने कहा कि आकार में अपेक्षाकृत छोटा दिखने वाला यह पोत अपनी युद्धक क्षमता के लिहाज से बेहद शक्तिशाली है. उन्होंने कहा कि जहाज को उसके आकार से नहीं आंका जाना चाहिए, क्योंकि इसमें अत्याधुनिक हथियारों और सेंसरों का घना संयोजन किया गया है. कमांडर मलपोत्रा ने कहा, ‘मैं कहना चाहूंगा कि इस जहाज के आकार को देखकर इसकी क्षमता का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए. यह छोटा जरूर दिखता है, लेकिन इसमें बड़ी मात्रा में हथियार और सेंसर लगे हैं. इसमें दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और निशाना बनाने की सभी जरूरी क्षमताएं मौजूद हैं.’ उन्होंने कहा कि समुद्र की सतह पर उभरते खतरों से निपटने के लिए भी जहाज को पर्याप्त क्षमता के साथ तैयार किया गया है.

पाकिस्‍तान ने हाल में चीन से हंगोर क्‍लास की पनडुब्‍बी खरीदी है. INS अग्रय को उसका जवाब माना जा रहा है. (फाइल फोटो/PTI)

सबमरीन को ऐसे तबाह करेगा INS अग्रय

कमांडर मलपोत्रा ने बताया कि INS अग्रय में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए स्वदेशी रूप से विकसित सोनार सूट, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो ट्यूब और डिकॉय सिस्टम लगाए गए हैं. यह डिकॉय सिस्टम दुश्मन की ओर से दागे गए टॉरपीडो को भटकाने में मदद करता है, जिससे युद्धपोत की सुरक्षा क्षमता बढ़ जाती है. अधिकारियों के मुताबिक, यह पोत तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होगा. INS दुनागिरी और INS संशोधक भी भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे. दुनागिरी एक एडवांस युद्धपोत के रूप में नौसेना की युद्धक क्षमता को सुदृढ़ करेगा, जबकि संशोधक अत्याधुनिक सर्वेक्षण और हाइड्रोग्राफिक क्षमताओं से समुद्री मानचित्रण, नौवहन सुरक्षा और सामरिक समुद्री सूचनाओं के संकलन में योगदान देगा.

हिन्‍द महासागर में भी बढ़ेगी ताकत

नौसेना अधिकारियों ने कहा कि इन तीनों पोतों का एक साथ शामिल होना केवल बेड़े की संख्या बढ़ाने भर का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल तैयारी, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति को नई मजबूती देने वाला कदम है. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इन युद्धपोतों को राष्ट्र को समर्पित किया जाना भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति और रक्षा आधुनिकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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