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Hyderabad Woman Engineer Pareshan | Work-Life Balance Debate & Viral Post


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58 मिनट पहले

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प्राइवेट जॉब करते हुए वर्क लाइफ को बैलेंस करना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा हैदराबाद की सिविल इंजीनियर द्वारा लिखी गई पोस्ट से लगाया जा सकता है। 25 साल की सिविल इंजीनियर ने रेडिट पर लिखी पोस्ट के जरिये अपना दुख बताया। उसके लिखा कि वह हैदराबाद में एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी में पिछले 3 साल से सिविल इंजीनियर के पद पर है। उसका इंक्रीमेंट हर साल 1000 रुपए हुआ। फिलहाल उसकी सैलरी 23000 रुपए है। महिला ने खराब वर्क लाइफ बैलेंस पर सवाल उठाए हैं।

काम के 6 दिन को लेकर बहस शुरू

छह दिन की लगातार नौकरी, कम सैलरी, परिवार के लिए समय की कमी और मानसिक थकान से जुड़ी उनकी एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस पोस्ट ने देशभर में वर्क-लाइफ बैलेंस, कर्मचारियों की मानसिक सेहत, कम वेतन और छह दिन काम करने की व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

IIIT से बीटेक किया

महिला ने साल 2023 में IIIT Nuzvid से बीटेक की डिग्री हासिल की थी। नौकरी मिलने के लिए वह शुक्रगुजार हैं, लेकिन हफ्ते भर लंबे काम के घंटों की वजह से वह बहुत थका हुआ महसूस करती हैं। उन्होंने बताया कि घर लौटने के बाद, उनमें अक्सर घर के छोटे-मोटे काम करने, परिवार के साथ समय बिताने के लिए भी एनर्जी नहीं बचती। पिछले 3 सालों से मैं हफ्ते में 6 दिन काम कर रही हूं।

3 साल में बढ़े सिर्फ 3000 रुपए

इस महिला ने अपनी पोस्ट में लिखा कि ‘मैं सच में नौकरी बदलना चाहती हूं। मैं कम सैलरी पर भी काम करने को तैयार हूं, लेकिन दूसरी कंपनियां भी 6 दिन काम करने की शर्त रख रही हैं।’

एक रेडिट यूजर ने पूछा कि आप किराया कैसे देती हैं और पैसे कैसे बचाती हैं? इस पर इंजीनियर ने जवाब दिया, ‘सेविंग्स के लिए कोई पैसा नहीं बचता, 8 हजार किराया जाता है, 10 हजार घर भेजती हूं, और 5 हजार आने-जाने और दूसरे खर्चों के लिए रखती हूं।

इंजीनियर ने यह भी बताया कि उन्होंने दूसरी नौकरी तलाशने की कोशिश की लेकिन वहां भी लगभग वही हालात मिल। उनके मुताबिक सिविल इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कई कंपनियां आज भी सप्ताह में छह दिन काम कराती हैं।

ऐसे में केवल कंपनी बदलने से वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि अगर बेहतर जीवन चाहिए तो शायद पूरा सेक्टर ही बदलना पड़े, लेकिन यह फैसला हर किसी के लिए आसान नहीं होता।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

रेडिट पर यह पोस्ट वायरल होते ही सिर्फ सिविल इंजीनियर ही नहीं, बल्कि कंस्ट्रक्शन, सेल्स, आईटी और दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों ने भी माना कि वे भी इसी तरह की परेशानियों से गुजर रहे हैं।

कई लोगों ने कहा कि साइट पर होने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी नौकरियों में काम का दबाव काफी ज्यादा होता है और कर्मचारियों को लंबे समय तक लगातार काम करना पड़ता है।

वहीं कुछ लोगों का मानना था कि डिजाइन, कंसल्टिंग और बहुराष्ट्रीय (MNC) कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर माहौल मिलता है। इन कंपनियों में ज्यादातर पांच दिन वर्क डेज होता है और कर्मचारियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस भी बेहतर रहता है।

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