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कुन्दा| झामुमो के कुंदा युवा प्रखंड अध्यक्ष मिथिलेश यादव ने पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान मिथिलेश यादव ने उन्हें कुंदा प्रखंड की ज्वलंत समस्याओं और जनहित के मुद्दों से विस्तार से अवगत कराया।मुलाकात के दौरान मिथिलेश यादव ने क्षेत्र के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, प्रखंड क्षेत्र में पेयजल, जर्जर सड़कों और बिजली की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की मांग की। मिथिलेश यादव ने बताया कि कुंदा प्रखंड कई दूरदराज के इलाकों से घिरा है, जहाँ सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ धरातल तक पहुंचाने में तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और स्थानीय स्तर पर कौशल विकास के कार्यों को बढ़ावा देने का आग्रह किया।झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने मिथिलेश यादव की बातों को गंभीरता से सुना। भास्कर न्यूज | पत्थलगडा/गिद्धौर द्वारी कोल साइडिंग के संचालन को लेकर क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है। साइडिंग के लिए एक साथ दो कांटा घर (वेटब्रिज) बनाए जाने के बाद आसपास के गांवों के लोग दो गुटों में बंट गए हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने कांटा घर से कोयला डंपिंग कार्य शुरू कराने के प्रयास में जुटे हैं। द्वारी रेलवे स्टेशन को डंपिंग यार्ड के रूप में विकसित किया गया है। जहां से एनटीपीसी के लिए कोयले की ढुलाई होनी है। ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर एक साथ दो कांटा घर का निर्माण और सेटअप किया गया। जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। एक गुट युवाओं की समिति के नाम पर सक्रिय है। जबकि दूसरे गुट में कई प्रभावशाली लोगों का समर्थन है। दोनों के बीच साइडिंग संचालन को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। हाल ही में साइडिंग में कोयला गिराने को लेकर दोनों गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। द्वारी कोल साइडिंग में कोयला डंपिंग रोकने की मांग गिद्धौर प्रखंड की द्वारी पंचायत के मुखिया जगदीश यादव ने पुलिस अधीक्षक चतरा, उपायुक्त समेत केंद्रीय कोयला मंत्री को आवेदन देकर शिवपुर-कठौतिया रेलवे लाइन के अंतर्गत द्वारी कोल साइडिंग में कोयला डंपिंग कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।मुखिया ने आरोप लगाया है कि संवेदक द्वारा ग्रामसभा की स्वीकृति और स्थानीय ग्रामीणों की सहमति के बिना मनमाने ढंग से कोयला डंपिंग कार्य शुरू कराया जा रहा है। इससे क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ विस्थापित परिवारों, किसानों और मजदूरों के प्रभावित होने की आशंका है।
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