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barish ki jahrili ghas: बरसात के मौसम में हरी घास के साथ उगने वाले जहरीले खरपतवार दुधारू पशुओं के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. इन पौधों के सेवन से पशुओं को अपच, पेट फूलना, दस्त, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यदि पशु जहरीली घास खा ले, तो उसे तुरंत साफ पानी पिलाएं और प्राथमिक सहायता के बाद बिना देर किए पशु चिकित्सक से इलाज कराएं.
देवघर: बरसात का मौसम शुरू होते ही खेत-खलिहान और खाली जमीन हरियाली से भर जाती है. इस दौरान ज्यादातर पशुपालक अपने गाय-भैंसों को खुले में चरने के लिए छोड़ देते हैं, ताकि उन्हें आसानी से हरा चारा मिल सके. लेकिन कई बार यही लापरवाही भारी पड़ जाती है. दरअसल, हर हरा दिखने वाला पौधा पशुओं के लिए सुरक्षित नहीं होता. बारिश के मौसम में कई तरह के जहरीले खरपतवार तेजी से उग आते हैं. यदि दुधारू पशु इन्हें खा लें तो वे गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं. इससे दूध का उत्पादन भी कम हो सकता है. कई मामलों में पशु की जान तक पर खतरा पैदा हो जाता है.
क्या कहते हैं पशु चिकित्सक
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने बताया कि बरसात के मौसम में पशुपालकों को अपने पशुओं पर विशेष नजर रखनी चाहिए. यदि पशु खुले में चर रहे हैं, तो यह जरूर देखें कि वे कौन-कौन से पौधे खा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई बार पशु हरी घास के साथ जहरीले खरपतवार भी खा लेते हैं. इसका असर तुरंत नहीं दिखता. कई बार कुछ घंटों बाद बीमारी के लक्षण सामने आते हैं. इसलिए पहले से सावधानी बरतना ही सबसे अच्छा बचाव है.
अंदरूनी अंग प्रभावित
डॉ. सोरेन ने बताया कि सबसे खतरनाक खरपतवारों में पार्थेनियम, जिसे कांग्रेस घास भी कहा जाता है, शामिल है. यह घास खेतों, सड़क किनारे और खाली पड़ी जमीन पर आसानी से उग जाती है. यदि गाय या भैंस इसे खा ले, तो उनकी त्वचा, पाचन तंत्र और शरीर के अंदरूनी अंग प्रभावित हो सकते हैं. लंबे समय तक इसका सेवन करने से पशु कमजोर होने लगता है. साथ ही उसकी दूध देने की क्षमता भी घट सकती है.
जहरीली घास खाने से दुधारू पशुओं को खतरा
बरसात के दिनों में तालाब किनारे, पानी भरे इलाकों और दलदली जमीन पर उगने वाला नरकुल खरपतवार भी पशुओं के लिए नुकसानदायक माना जाता है. इसे अधिक मात्रा में खाने से गाय-भैंसों को अपच, पेट फूलना और जहरीले प्रभाव की समस्या हो सकती है. इसलिए ऐसे स्थानों पर पशुओं को चराने से पहले वहां उगी घास और पौधों की पहचान कर लेना जरूरी है. इसके अलावा मदार का पौधा भी बेहद खतरनाक होता है. इस पौधे को तोड़ने पर सफेद रंग का दूध जैसा जहरीला तरल निकलता है. यदि यह पौधा पशु के पेट में चला जाए, तो उसे दस्त, बुखार, कमजोरी और बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि तुरंत इलाज कराना पड़ता है.
पशु बीमार हो जाए तो करें यह शुरुआती उपाय
यदि किसी पशु ने गलती से जहरीली घास या पौधा खा लिया हो और उसमें अपच, सुस्ती, पेट फूलना या अन्य परेशानी के लक्षण दिखाई दें, तो बिल्कुल लापरवाही नहीं करनी चाहिए. डॉ. पूनम सोरेन के अनुसार, शुरुआती स्थिति में पशु को पर्याप्त मात्रा में साफ पानी पिलाना चाहिए. घरेलू उपाय के तौर पर इमली का पानी भी दिया जा सकता है. इससे कई बार पशु को उल्टी हो जाती है और शरीर में गया जहरीला पदार्थ बाहर निकलने में मदद मिलती है. हालांकि, यह केवल प्राथमिक सहायता है. यदि पशु की हालत गंभीर लगे या लक्षण लगातार बने रहें, तो बिना देर किए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. समय पर इलाज मिलने से पशु की जान बचाई जा सकती है और गंभीर नुकसान से भी बचा जा सकता है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें