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इस मंदिर में तो यहां के पुजारी लोगों को मां बगलामुखी की पूजा करने की विधि और नियम भी समझाते हैं. पुजारी अखिलेश बताते हैं कि मां के पूजा में लोगों से गलती न हो इसलिए वह लोगों को जानकारी देते रहते हैं. उन्होंने कहा कि बताए गए नियम से मां की पूजा करने पर आपके शत्रु आपका बाल बांका नहीं कर पाएंगे.
झारखंड की राजधानी रांची के मेन रोड और दो जगह मां बगलामुखी मंदिर है. खासतौर पर जो साधना करते हैं वैसे साधक यहां पर दूर-दूर से आते हैं. खास बात ये है कि यहां पर लोग खासतौर पर 21 दिन का पाठ करते हैं और 21 दिन के अंदर उनकी मुराद पूरी होती है. यहां पर तंत्र विद्या भी होता है. इसके लिए भी लोग दूर-दूर से आते हैं.
इसके लिए सबसे पहले लोग मेन रोड स्थित प्राचीन बंगलामुखी मां के मंदिर आते हैं. कहा जाता है यह शत्रु का नाश करने वाली माता है. यहां पर सीएम हेमंत सोरेन भी कई बार अपनी पत्नी के साथ देखे जाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं. यहां पर कहा जाता है आप अपने शत्रु का नाम लेकर जो भी साधना करते हैं वह सिद्ध हो जाती है.
मंदिर के पुजारी राम नरेश बताते हैं, यह काफी पुराना और प्राचीन मंदिर है. यहां पर यूपी और बिहार जैसे दूसरे राज्यों से भी लोग आते हैं. अगर कोई बाहर से रांची घूमने आया है और इस स्थल के बारे में जानकारी है तो वह यहां पर एक बार माथा जरूर टेकते हैं. बेसन के लड्डू और चुनरी लेकर लोग पूजा अर्चना करते हैं. शाम के समय तो आपको यहां पर भव्य आरती और लंबी लाइन देखने को मिलेगी.
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दूसरा रांची के किशोरगंज स्थित रोड नंबर 8 में. यहां पर भी शाम में आरती काफी जबरदस्त देखने को मिलती है. दूर-दूर से सिर्फ इस आरती के लिए भक्त आते हैं. यहां पर पूजा करके आप जो भी मांगें वह मुराद पूरी हो जाती है. यहां पर अगर आप मन्नत मांगते हैं तो विधिवत पूजा करनी पड़ती है और 21 या 45 दिनों तक विशेष अनुष्ठान चलता है.
इस मंदिर में तो यहां के पुजारी लोगों को मां बगलामुखी की पूजा करने की विधि और नियम भी समझाते हैं. पुजारी अखिलेश बताते हैं कि मां के पूजा में लोगों से गलती न हो इसलिए वह लोगों को जानकारी देते रहते हैं. उन्होंने कहा कि बताए गए नियम से मां की पूजा करने पर आपके शत्रु आपका बाल बांका नहीं कर पाएंगे.
तीसरा बगलामुखी मंदिर रांची के कुम्हार टोली में है. यहां पर मंदिर के पुजारी से भक्त लोग नियम और विधि पूछकर मां की पूजा करते हैं. कुछ भक्त ऐसे हैं जो 45 दिन तक लगातार यहां पर आते हैं. पूजा करते हैं और व्रत और उपवास रखते हैं. रांची के इन तीनों मंदिरों में यहां के लोगों की मान्यता, आस्था और विश्वास के आधार पर काफी भीड़ जुटती है.