तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी सियासी उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है. पार्टी से कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों के अलग होने के बाद अब ममता बनर्जी के सबसे पुराने और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले सांसद कल्याण बनर्जी ने भी ऐसा बयान दिया है, जिसने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.
बांकुड़ा में 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली की तैयारियों को लेकर आयोजित पार्टी बैठक में कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि यदि पार्टी छोड़ चुके नेताओं और सांसदों को दोबारा तृणमूल में शामिल किया गया तो वह खुद भी पार्टी छोड़ देंगे. उन्होंने कहा, ‘जो जहां जाना चाहता है, जाए. लेकिन मैंने ममता दी से साफ कह दिया है कि अगर इन लोगों को दोबारा पार्टी में लिया गया तो मैं तृणमूल छोड़ दूंगा.’
बागी सांसदों पर साधा निशाना
कल्याण बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने उन्हें अपने राजनीतिक हित साधने के लिए साथ लिया है. उनका दावा था कि ‘एक देश-एक चुनाव’ से जुड़े प्रस्तावित कानून को संसद से पारित कराने के लिए भाजपा ने तृणमूल के सांसदों को अपने पाले में किया है.
उन्होंने कहा कि यदि यह कानून लागू हो जाता है तो 2029 में लोकसभा और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे. ऐसे में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का राजनीतिक भविष्य भी संकट में पड़ जाएगा.
महुआ मोइत्रा ने भी बागियों पर बोला हमला
बैठक में मौजूद कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी बागी सांसदों पर निशाना साधा. उन्होंने दावा किया कि भाजपा फिलहाल इन नेताओं को सीधे पार्टी में शामिल नहीं कर रही है, बल्कि उन्हें एक तरह के ‘बफर जोन’ में रखा गया है.
महुआ ने कहा कि 2029 में इन सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति और कमजोर हो जाएगी. तब न वे तृणमूल में लौट पाएंगे और न ही भाजपा में उनकी स्थिति मजबूत होगी.
पहले भी दिखा चुके हैं नाराजगी
यह पहला मौका नहीं है जब कल्याण बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जाहिर की हो. तृणमूल में बगावत शुरू होने के बाद एक हाईकोर्ट मामले से उन्हें हटाए जाने पर उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जताई थी और पार्टी छोड़ने तक की चेतावनी दी थी.
बाद में अभिषेक बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम पर खेद जताया, जिसके बाद कल्याण बनर्जी फिर सक्रिय रूप से पार्टी के साथ नजर आए. उन्होंने 21 जुलाई की रैली की तैयारियों से लेकर चुनाव आयोग में पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम को लेकर कानूनी लड़ाई तक अहम भूमिका निभाई.
ममता के सामने नई चुनौती
हाल के महीनों में तृणमूल कांग्रेस को कई बड़े झटके लगे हैं. कई सांसद और वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ चुके हैं. ऐसे में कल्याण बनर्जी जैसे वरिष्ठ और पुराने सहयोगी का सार्वजनिक तौर पर इस तरह की चेतावनी देना ममता बनर्जी के लिए नई राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है.
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या तृणमूल नेतृत्व भविष्य में बागी नेताओं की वापसी का रास्ता खोलता है या फिर पार्टी के पुराने नेताओं की नाराजगी को प्राथमिकता देता है.