रांची45 मिनट पहले
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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने JPSC सदस्य जमाल अहमद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। (फाइल)
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस बीच, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने JPSC सदस्य जमाल अहमद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जमाल अहमद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मरांडी ने आरोप लगाया है कि जमाल अहमद ने अपने पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक चल-अचल संपत्ति अर्जित की है। उन्होंने यह भी बताया कि जमाल अहमद की 2008 में लेक्चरर के रूप में हुई नियुक्ति का मामला पहले से ही CBI जांच के दायरे में है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र की एक प्रति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी साझा की है। यहां उन्होंने इन आरोपों का विस्तार से जिक्र किया है और JPSC जैसी संवैधानिक संस्था में ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि जमाल अहमद को तत्काल उनके पद से हटाया जाए और उनकी आय से अधिक संपत्ति की ACB से निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं का भविष्य JPSC जैसी संस्थाओं पर निर्भर करता है।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा पत्र।
चल और अचल संपत्तियों का एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया: बाबूलाल
मुख्यमंत्री को लिखे चिठ्ठी के माध्यम से बाबूलाल मरांडी ने बताया है कि उन्हें अत्यंत विश्वसनीय सूत्रों से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि JPSC के वर्तमान सदस्य जमाल अहमद ने विगत कुछ वर्षों में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर चल और अचल संपत्तियों का एक विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया है।
वर्तमान में राजधानी रांची में उनके पास 3000 से 4000 वर्गफुट का एक आलीशान फ्लैट मौजूद है और ऐसी सूचना है कि वे शहर में एक अन्य बड़े फ्लैट की भी तलाश कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त हजारीबाग जिले में भी उनके द्वारा बड़े पैमाने पर बेनामी और अचल संपत्तियां अर्जित किए जाने की पुख्ता चर्चा है।
नियमों को ताक पर रख जमाल अहमद को JPSC का सदस्य किया नियुक्त
बाबूलाल मरांडी के अनुसार, यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि उस नियुक्ति प्रक्रिया में हुई भारी धांधली को लेकर वर्तमान में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जांच की जा रही है।
यह एक सर्वविदित नियम और सामान्य नैतिकता है कि यदि किसी व्यक्ति की नियुक्ति प्रक्रिया स्वयं ही जांच एजेंसियों के दायरे में हो, तो उसे JPSC जैसी सर्वोच्च और पवित्र संवैधानिक संस्था का सदस्य किसी भी परिस्थिति में नहीं बनाया जा सकता। इसके बावजूद आपकी सरकार ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के दबाव में आकर नियमों को ताक पर रखते हुए जमाल अहमद को JPSC का सदस्य नियुक्त कर दिया।
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में लिखा है कि जब ऐसे दागी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे व्यक्ति को JPSC का सदस्य बनाया जाएगा तो राज्य के लाखों मेधावी युवाओं का इस संस्था पर कैसे भरोसा रहेगा? ऐसी स्थिति में आयोग की नियुक्तियों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और अभ्यर्थियों का विश्वास किसी भी कीमत पर कायम नहीं रह सकता। यह राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

गुरुवार को सीआईडी ने आयोग के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते के आवास पर छापेमारी की।
जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन के आवास पर सीआईडी की छापेमारी इधर, जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर गुरुवार को सीआईडी ने आयोग के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते के आवास पर छापेमारी की। सीआईडी ने एक बार फिर जेपीएससी कार्यालय और परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के ठिकानों को भी खंगाला।
इन तीनों जगह से कंप्यूटर, एडिशनल हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और कई दस्तावेजों को जब्त किया। सीआईडी ने विधिवत रूप से सीजर लिस्ट तैयार कर इन्हें जब्त किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर साक्ष्य के रूप में इसे कोर्ट में पेश किया जा सके।

एल ख्यांगते के आवास पर सीआईडी की टीम अपने साथ कुछ दस्तावेज लेकर भी पहुंची थी।
इससे पहले सीआईडी ने मंगलवार को भी जेपीएससी कार्यालय, आयोग की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के आवास और परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल से जुड़े आठ ठिकानों पर छापेमारी की थी। आठ संदिग्धों से पूछताछ की थी। फिर बुधवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
उधर, छापेमारी के कुछ घंटे बाद ही चेयरमैन एल ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने लिखा था कि पूरी पारदर्शिता से काम किया। लेकिन सीआईडी की छापेमारी से वे आहत हैं। इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं। वहीं इस मामले में सीआईडी जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
