Last Updated:
क्या आप जानते हैं कि ‘एयर इंडिया’ नाम किसी सरकारी फैसले से नहीं, बल्कि एयरलाइन स्टाफ की वोटिंग से चुना गया था? 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया रखा गया. इससे पहले कंपनी के स्टाफ ने चार नामों में से वोट देकर ‘एयर इंडिया’ को चुना था. जानिए जेआरडी टाटा की पहली उड़ान से लेकर एयर इंडिया के नामकरण, राष्ट्रीयकरण और 69 साल बाद दोबारा टाटा समूह के पास लौटने तक की पूरी दिलचस्प कहानी.
69 साल बाद फिर टाटा के पास लौटी: करीब 69 साल तक सरकारी कंपनी रहने के बाद जनवरी 2022 में एयर इंडिया फिर से टाटा समूह के पास लौट आई. टाटा समूह ने इसे सरकार से खरीद लिया. यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे खास घटनाओं में से एक मानी जाती है. जिस कंपनी की शुरुआत जेआरडी टाटा ने की थी, वही एयर इंडिया कई दशक बाद फिर अपने मूल मालिकों के पास वापस पहुंच गई. (एआई इमेज)
सरकार के पास चली गई एयर इंडिया: 1953 में भारत सरकार ने सभी बड़ी एयरलाइनों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला किया. इसके बाद एयर इंडिया सरकार के नियंत्रण में आ गई. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की जिम्मेदारी एयर इंडिया के पास रही, जबकि घरेलू उड़ानों के लिए ‘इंडियन एयरलाइंस’ नाम की अलग सरकारी कंपनी बनाई गई. इस तरह कर्मचारियों द्वारा चुना गया ‘एयर इंडिया’ नाम देश की राष्ट्रीय एयरलाइन की पहचान बन गया. (एआई इमेज)
दुनिया तक पहुंची भारत की उड़ान: 1947 में देश आजाद हुआ और उसके बाद भारत को अपनी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन की जरूरत महसूस हुई. 1948 में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी और ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ बनाई. 8 जून 1948 को मुंबई से लंदन के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान रवाना हुई. इसके साथ ही एयर इंडिया ने दुनिया के विमानन बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी. (एआई इमेज)
Add News18 as
Preferred Source on Google
29 जुलाई 1946 को मिला नया नाम: वोटिंग के नतीजे के बाद 29 जुलाई 1946 को ‘टाटा एयरलाइंस’ का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘एयर इंडिया’ कर दिया गया. इसी दिन कंपनी को एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में भी रजिस्टर्ड किया गया. यह भारतीय विमानन इतिहास का बड़ा पड़ाव था. अब यह सिर्फ टाटा समूह की कंपनी नहीं रही, बल्कि देश की नई पहचान के रूप में आगे बढ़ने लगी. (एआई इमेज)
दूसरे दौर में एयर इंडिया बनी विजेता: पहले दौर के बाद सिर्फ दो नामों के बीच दोबारा वोटिंग कराई गई. कर्मचारियों को एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस में से एक नाम चुनना था. इस बार एयर इंडिया को 72 वोट मिले, जबकि इंडियन एयरलाइंस को 58 वोट मिले. इस तरह 14 वोटों से एयर इंडिया जीत गई. कर्मचारियों ने ऐसा नाम चुना, जो पूरे देश की पहचान बन सके. (एआई इमेज)
पहले दौर में कांटे की टक्कर: वोटिंग पूरी होने के बाद जब पहले दौर के वोट गिने गए तो मुकाबला काफी दिलचस्प रहा. एयर इंडिया को 64 वोट मिले, जबकि इंडियन एयरलाइंस को 51 वोट मिले. बाकी दोनों नाम काफी पीछे रह गए. इससे साफ हो गया कि असली मुकाबला इन्हीं दो नामों के बीच है. कम अंतर होने की वजह से कर्मचारियों में अंतिम नतीजे को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई. (एआई इमेज)
नाम के लिए रखे गए चार विकल्प: कंपनी ने कर्मचारियों के सामने चार नाम रखे. पहला था एयर इंडिया, दूसरा इंडियन एयरलाइंस, तीसरा ट्रांस-इंडियन एयरलाइंस और चौथा पैन-इंडियन एयरलाइंस. सभी कर्मचारियों को अपनी पसंद का नाम चुनने का मौका दिया गया. इन नामों के जरिए ऐसी पहचान बनाने की कोशिश थी, जो पूरे भारत और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सोच को भी दिखा सके. (एआई इमेज)
कंपनी के कर्मचारियों से मांगी गई राय: जब नई कंपनी बनाने की तैयारी हुई तो उसके लिए नया नाम चुनने का फैसला किया गया. टाटा समूह चाहता था कि कंपनी सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश की पहचान बने. इसी वजह से एक अनोखा कदम उठाया गया. कंपनी के कर्मचारियों से वोटिंग कराकर नया नाम चुनने का फैसला लिया गया. उस दौर में किसी बड़ी कंपनी में इस तरह का फैसला सभी को हैरान करने वाला था. (एआई इमेज)
दूसरे विश्व युद्ध के बाद बदली सोच: द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने के साथ टाटा एयरलाइंस की उड़ानें थम गई थी. एयरलाइंस के सभी प्लेंस को सेना के साथ काम करने के लिए भेज दिया गया था. युद्ध खत्म होने के बाद पैसेंजर फ्लाइट्स का ऑपरेशन एक बार फिर शुरू हुआ. एयरलाइंस की बढ़ती लोकप्रियता और रिस्पांस को देखते हुए कंपनी इसे सिर्फ टाटा संस का डिपार्टमेंट रखने की बजाय एक अलग सार्वजनिक कंपनी बनाने की फैसला ले लिया. (एआई इमेज)
टाटा एयरलाइंस से हुई शुरुआत: भारत में हवाई यात्रा की शुरुआत 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने ‘टाटा एयरलाइंस’ के साथ की थी. शुरुआत में इसका काम कराची से मुंबई तक हवाई डाक पहुंचाना था. पहली उड़ान खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी. बाद में कंपनी ने पैंसेजर्स को भी ले जाना शुरू किया. उस समय यह टाटा समूह का ही हिस्सा थी और उसकी पहचान भी टाटा परिवार के नाम से जुड़ी हुई थी. (एआई इमेज)
टाटा एयरलाइंस से एयर इंडिया तक का यह सफर कर्मचारियों की वोट, ऐतिहासिक फैसलों और एक राष्ट्रीय पहचान की कहानी है. जानिए कैसे बनी भारत की सबसे पहचानी जाने वाली एयरलाइन. (एआई इमेज)
टाटा एयरलाइंस से हुई शुरुआत: भारत में हवाई यात्रा की शुरुआत 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने ‘टाटा एयरलाइंस’ के साथ की थी. शुरुआत में इसका काम कराची से मुंबई तक हवाई डाक पहुंचाना था. पहली उड़ान खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी. बाद में कंपनी ने पैंसेजर्स को भी ले जाना शुरू किया. उस समय यह टाटा समूह का ही हिस्सा थी और उसकी पहचान भी टाटा परिवार के नाम से जुड़ी हुई थी. (एआई इमेज)
दूसरे विश्व युद्ध के बाद बदली सोच: द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने के साथ टाटा एयरलाइंस की उड़ानें थम गई थी. एयरलाइंस के सभी प्लेंस को सेना के साथ काम करने के लिए भेज दिया गया था. युद्ध खत्म होने के बाद पैसेंजर फ्लाइट्स का ऑपरेशन एक बार फिर शुरू हुआ. एयरलाइंस की बढ़ती लोकप्रियता और रिस्पांस को देखते हुए कंपनी इसे सिर्फ टाटा संस का डिपार्टमेंट रखने की बजाय एक अलग सार्वजनिक कंपनी बनाने की फैसला ले लिया. (एआई इमेज)
कंपनी के कर्मचारियों से मांगी गई राय: जब नई कंपनी बनाने की तैयारी हुई तो उसके लिए नया नाम चुनने का फैसला किया गया. टाटा समूह चाहता था कि कंपनी सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि पूरे देश की पहचान बने. इसी वजह से एक अनोखा कदम उठाया गया. कंपनी के कर्मचारियों से वोटिंग कराकर नया नाम चुनने का फैसला लिया गया. उस दौर में किसी बड़ी कंपनी में इस तरह का फैसला सभी को हैरान करने वाला था. (एआई इमेज)
नाम के लिए रखे गए चार विकल्प: कंपनी ने कर्मचारियों के सामने चार नाम रखे. पहला था एयर इंडिया, दूसरा इंडियन एयरलाइंस, तीसरा ट्रांस-इंडियन एयरलाइंस और चौथा पैन-इंडियन एयरलाइंस. सभी कर्मचारियों को अपनी पसंद का नाम चुनने का मौका दिया गया. इन नामों के जरिए ऐसी पहचान बनाने की कोशिश थी, जो पूरे भारत और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सोच को भी दिखा सके. (एआई इमेज)
पहले दौर में कांटे की टक्कर: वोटिंग पूरी होने के बाद जब पहले दौर के वोट गिने गए तो मुकाबला काफी दिलचस्प रहा. एयर इंडिया को 64 वोट मिले, जबकि इंडियन एयरलाइंस को 51 वोट मिले. बाकी दोनों नाम काफी पीछे रह गए. इससे साफ हो गया कि असली मुकाबला इन्हीं दो नामों के बीच है. कम अंतर होने की वजह से कर्मचारियों में अंतिम नतीजे को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई. (एआई इमेज)
दूसरे दौर में एयर इंडिया बनी विजेता: पहले दौर के बाद सिर्फ दो नामों के बीच दोबारा वोटिंग कराई गई. कर्मचारियों को एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस में से एक नाम चुनना था. इस बार एयर इंडिया को 72 वोट मिले, जबकि इंडियन एयरलाइंस को 58 वोट मिले. इस तरह 14 वोटों से एयर इंडिया जीत गई. कर्मचारियों ने ऐसा नाम चुना, जो पूरे देश की पहचान बन सके. (एआई इमेज)
29 जुलाई 1946 को मिला नया नाम: वोटिंग के नतीजे के बाद 29 जुलाई 1946 को ‘टाटा एयरलाइंस’ का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘एयर इंडिया’ कर दिया गया. इसी दिन कंपनी को एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में भी रजिस्टर्ड किया गया. यह भारतीय विमानन इतिहास का बड़ा पड़ाव था. अब यह सिर्फ टाटा समूह की कंपनी नहीं रही, बल्कि देश की नई पहचान के रूप में आगे बढ़ने लगी. (एआई इमेज)
दुनिया तक पहुंची भारत की उड़ान: 1947 में देश आजाद हुआ और उसके बाद भारत को अपनी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन की जरूरत महसूस हुई. 1948 में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी और ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ बनाई. 8 जून 1948 को मुंबई से लंदन के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान रवाना हुई. इसके साथ ही एयर इंडिया ने दुनिया के विमानन बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी. (एआई इमेज)
सरकार के पास चली गई एयर इंडिया: 1953 में भारत सरकार ने सभी बड़ी एयरलाइनों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला किया. इसके बाद एयर इंडिया सरकार के नियंत्रण में आ गई. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की जिम्मेदारी एयर इंडिया के पास रही, जबकि घरेलू उड़ानों के लिए ‘इंडियन एयरलाइंस’ नाम की अलग सरकारी कंपनी बनाई गई. इस तरह कर्मचारियों द्वारा चुना गया ‘एयर इंडिया’ नाम देश की राष्ट्रीय एयरलाइन की पहचान बन गया. (एआई इमेज)
69 साल बाद फिर टाटा के पास लौटी: करीब 69 साल तक सरकारी कंपनी रहने के बाद जनवरी 2022 में एयर इंडिया फिर से टाटा समूह के पास लौट आई. टाटा समूह ने इसे सरकार से खरीद लिया. यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे खास घटनाओं में से एक मानी जाती है. जिस कंपनी की शुरुआत जेआरडी टाटा ने की थी, वही एयर इंडिया कई दशक बाद फिर अपने मूल मालिकों के पास वापस पहुंच गई. (एआई इमेज)
टाटा एयरलाइंस के रूप में 1932 में डी हैविलैंड पस मॉथ से शुरू हुआ यह सफर 1946 में कर्मचारियों की वोटिंग से ‘एयर इंडिया’ बना. 1948 में लॉकहीड कॉन्स्टेलेशन के साथ पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान, 1953 में राष्ट्रीयकरण, 1962 में दुनिया की पहली ऑल-जेट एयरलाइन बनने का गौरव और 2022 में टाटा समूह की वापसी हुई.