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Weed Control Measures: झारखंड में कम बारिश होने की वजह से बहुत से किसान अरहर की खेती कर रहे हैं. हालांकि अरहर हो या धान की सीधी बुवाई दोनों ही फसलों में खरपतवार बड़ी समस्या के रूप में उभरती है. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने कुछ असरदार उपाय बताए.
पलामू. झारखंड में इस बार मानसून के सीजन में कम बारिश होने से किसानों के लिए बड़ी समस्या आ गई है. ऐसे में किसान अरहर की खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं. अरहर की खेती हो या धान की सीधी बुआई, शुरुआती दिनों में खरपतवार किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. खरपतवार खेत में मौजूद पोषक तत्व, पानी और धूप का इस्तेमाल कर फसल के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं. इससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए बुआई के शुरुआती दिनों से ही खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान देना जरूरी है.
बुआई के तुरंत बाद किया जा सकता है नियंत्रण
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने लोकल18 को बताया कि बुआई करने के बाद शुरुआती खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडिमेथालिन जैसे प्री-इमर्जेंस खरपतवारनाशी का इस्तेमाल किया जाता है. इसे सामान्यतः बुआई के करीब 2-3 दिन के अंदर, फसल और खरपतवार निकलने से पहले, खेत में छिड़का जाता है. हालांकि, दवा की मात्रा उत्पाद के फॉर्मुलेशन पर निर्भर करती है, इसलिए किसान बोतल के लेबल पर दी गई अनुशंसित मात्रा और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही इसका प्रयोग करें.
दूसरे चरण में भी करना पड़ सकता है नियंत्रण
उन्होंने बताया कि पेंडिमेथालिन के इस्तेमाल के बाद भी खेत में कुछ खरपतवार उग सकते हैं. ऐसे में खरपतवार की प्रजाति, फसल की अवस्था और इस्तेमाल किए गए उत्पाद के अनुसार आगे का नियंत्रण तय किया जाता है. इमेजेथापायर जैसे खरपतवारनाशी कुछ परिस्थितियों में अरहर में उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इसकी मात्रा फॉर्मुलेशन और फसल की अवस्था पर निर्भर करती है. इसलिए किसान बिना लेबल देखे तय मात्रा में दवा मिलाकर छिड़काव न करें.
धान की सीधी बुआई में भी चुनौती
आगे कहा कि धान की सीधी बुआई यानी डीएसआर पद्धति में भी खरपतवार नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है. इसमें खेत में पानी खड़ा करके रोपाई करने के बजाय बीज की सीधे बुआई की जाती है, इसलिए शुरुआती अवस्था में खरपतवार तेजी से उग सकते हैं. अगर समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो खरपतवार धान के पौधों की बढ़वार और उपज को प्रभावित कर सकते हैं.
दवा के साथ अपनाएं खेती के तरीके
खरपतवार नियंत्रण के लिए केवल रसायनों पर निर्भर रहने के बजाय खेत की स्थिति के अनुसार समय पर निराई-गुड़ाई, उचित फसल दूरी और खेत की साफ-सफाई जैसे उपाय भी अपनाएं. सबसे जरूरी बात यह है कि किसान किसी भी खरपतवारनाशी की मात्रा केवल मिलीलीटर प्रति लीटर के हिसाब से तय न करें, क्योंकि अलग-अलग कंपनियों के उत्पादों का फॉर्मुलेशन अलग हो सकता है. लेबल पर दर्ज मात्रा, फसल और खरपतवार के लिए स्वीकृत उपयोग साथ ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही छिड़काव करें. इससे फसल को नुकसान से बचाते हुए खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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