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अवसर का सदुपयोग ही असली सफलता: प्रमाण सागर




जीवन में अवसर मिलना दुर्लभ है, लेकिन उससे भी दुर्लभ उनका सदुपयोग करना है। मनुष्य जन्म, विवेक, संस्कार और धर्म का अवसर मिलना बड़ी उपलब्धि है। व्यक्ति को यह देखने के बजाय कि उसे क्या नहीं मिला, इस बात पर विचार करना चाहिए कि मिले हुए अवसरों का उसने समाज, धर्म और आत्मकल्याण के लिए कितना उपयोग किया। ये बातें राष्ट्रसंत मुनि प्रमाण सागर महाराज ने धर्मसभा में कहीं। अकबर-बीरबल का प्रसंग सुनाते हुए मुनिश्री ने कहा कि दो सेठ, दो साधु और दो भिखारी जीवन की तीन प्रवृत्तियों के प्रतीक हैं। सेठों ने संपदा का उपयोग केवल भोग में किया, साधुओं ने आत्मकल्याण में, जबकि भिखारियों ने किसी का भला नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्राप्त पुण्य का सदुपयोग कर सत्कर्म करने वाला ही जीवन सफल बनाता है। मुनिश्री के सानिध्य में सेवायतन और गुणायतन की नई कार्यकारिणी की बैठक हुई। उन्होंने बताया कि सेवायतन वर्ष 2007 से जनसेवा कर रहा है और प्रतिदिन 100 से 125 जरूरतमंदों को मुफ्त चिकित्सा दे रहा है। सेवायतन की नई टीम में विजय जैन (मुजफ्फरनगर) अध्यक्ष, चंद कुमार सिंघई (जबलपुर) कार्याध्यक्ष, हर्ष अजमेरा (गया) महामंत्री और अन्नू अजमेरा कोषाध्यक्ष चुने गए। वहीं गुणायतन कार्यकारी परिषद में रमेश सरावगी (कोलकाता) अध्यक्ष, सुनील पहाड़िया कार्याध्यक्ष, सुरेंद्र जैन (गुवाहाटी) महामंत्री, प्रदीप काला, योगेंद्र जैन (दिल्ली) व विजय सरावगी वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा अरुण गंगवाल संयुक्त महामंत्री बनाए गए। अविनाश जैन (विदिशा) को दोनों संस्थाओं का प्रवक्ता नियुक्त किया गया, जबकि कपूर चंद जैन को सम्मानित किया गया। एसोसिएट अध्यक्ष विनोद काला ने पंचकल्याणक महोत्सव की तैयारियों की जानकारी दी। मौके पर विजय कासलीवाल, बीरू छाबड़ा, राजेश विनायका, विक्की जैन, अशित बैनाडा, सुनील अजमेरा, निर्मल जैन व कुलदीप जैन समेत कई कार्यकर्ता सम्मानित हुए।



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