लोहरदगा, विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग व श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि नाग पंचमी भारतीय संस्कृति में प्रकृति संरक्षण, जीव-दया और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण पर्व है। इस वर्ष नाग पंचमी 17 अगस्त को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। उन्होंने कहा कि श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाए जाने वाले इस पर्व का उद्देश्य नाग देवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। संजय सर्राफ ने कहा कि भगवान शिव के गले में नाग और भगवान विष्णु की शेषनाग पर शयन मुद्रा नागों की धार्मिक महत्ता को दर्शाती है। नाग पंचमी से जुड़ी महाभारत में राजा जनमेजय के सर्पसत्र तथा भगवान श्रीकृष्ण और कालिया नाग की कथाएं भी प्रकृति और जीव संरक्षण का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि नाग खेतों और पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए लोगों को जीवित सांपों को पकड़कर या परेशान कर पूजा करने के बजाय उनके प्राकृतिक आवास और जीवन की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। नाग पंचमी हमें आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण, जीवों के प्रति करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश देती है।
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