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JSSC-CGL Exam Cancelled in Jharkhand | CBI Probe Demand


रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र आंदोलन बुधवार को 26वें दिन भी जारी है। सरकार के फैसले से छात्र खुश हैं, लेकिन CBI जांच की मांग पर अड़े हैं। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के ऐलान के बाद सीजीएल के सफल अभ्

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दरअसल, झारखंड सरकार ने 17 अगस्त को JSSC-CGL परीक्षा रद्द कर दी। परीक्षा एजेंसी TDPL द्वारा ली गई सभी परीक्षाओं को कैंसिल करने की घोषणा की गई। राज्य सरकार ने ये भी ऐलान किया कि साल 2014 से अब तक हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं की जांच कराई जाएगी।

वहीं जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने 20 अगस्त को प्रस्तावित सीएम हाउस घेराव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है। मंच ने कहा कि सीएम के सकारात्मक रुख को देखते हुए यह फैसला लिया ​गया है, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। सीबीआई जांच, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, सुधार और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। रूपेश पाल और सबीता ने अनशन खत्म नहीं किया है। सीबीआई जांच की घोषणा के बाद ही आंदोलन खत्म होगा। रात में टेंट मंगाया, लेकिन पुलिस ने लगाने से रोक दिया इधर, जेएसएससी सफल उम्मीदवारों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक मोबाइल फ्लैश लाइट मार्च निकाला। वे तत्काल सरकार से फैसला को वापस लेने की मांग की। सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लडने की बात कही है। फिर देर रात वे प्रोजेक्ट भवन के गेट के सामने धरने पर बैठ गए। अभ्यर्थियों ने देर रात टेंट मंगाया, लेकिन पुलिस ने उन्हें लगाने से रोक दिया। इससे अभ्यर्थी बारिश के बीच खुले में सड़क किनारे सो गए। उधर, आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने भी सुरक्षा बढ़ा दी। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को वहां तैनात कर दिया गया। धुर्वा थाने की पुलिस ने भी गश्त बढ़ा दी। आज सभी आगे क्या करना है इसपर निर्णय लेंगे।

जेएसएससी सफल कैंडिडेट्स ने मोबाइल फ्लैश लाइट मार्च निकाला।

जेएसएससी सफल कैंडिडेट्स ने मोबाइल फ्लैश लाइट मार्च निकाला।

‘हम सरकारी कर्मचारी थे आज बेरोजगार हैं’

अब JSSC-CGL एग्जाम पास करने वाले कैंडिडेट्स परीक्षा रद्द होने विरोध कर रहे हैं। उन्हें अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि कल तक हम सरकारी कर्मचारी थे आज बेरोजगार हैं।

इधर, सरकार के फैसले से आंदोलनरत छात्र खुश हैं, लेकिन CBI जांच की मांग पर अड़े हैं। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा, सरकार के नोटिफिकेशन की स्टडी करेंगे। जब तक CBI जांच की मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा।

वहीं, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए झारखंड सरकार की तारीफ की और कहा हमने छात्रों की बात सुनी और फैसला लिया।

JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद भी छात्रों का आंदोलन जारी है।

JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद भी छात्रों का आंदोलन जारी है।

CM बोले- रिटायर्ड जज की देखरेख में जांच होगी

कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार रात परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। कहा-

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SIT और CID दोनों की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। चूंकि जांच चल रही है, इसलिए हर बात खुले तौर पर बताना संभव नहीं है। इसमें कई कंपनियों का एक जटिल और आपस में जुड़ा हुआ नेटवर्क शामिल है, जिन्होंने अलग-अलग समय पर यहां काम किया है। 2014 से लेकर अब तक आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच CID से कराई जाएगी।

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नोटिफिकेशन के बाद आगे की रणनीति तय करेंगेः छात्र

छात्र नेता रवीन्द्र पासवान ने कहा, “सरकार ने हमसे अपील की ये आंदोलन और अनशन को खत्म करें, लेकिन जो हमारी मांगे CBI संबंधित हैं उस पर सरकार की अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।

हमारी CBI जांच से संबंधित जो मांगें है, वे बरकरार हैं। सरकार की तरफ से जो भी नोटिफिकेशन आएगा, उसकी हम स्टडी करेंगे। उसके बाद हम आंदोलन की रणनीति के बारे में बताएंगे।’

JSSC-CGL पास उम्मीदवारों का धरना

JSSC-CGL परीक्षा से जिन उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई थी और जिन्होंने अपने पदों पर काम भी किया था, वे अपनी नियुक्तियों को लेकर स्पष्टता और न्याय की मांग करते हुए प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना दे रहे हैं।

कैबिनेट की विशेष बैठक के दौरान ही CGL के सफल अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुट गए। अभ्यर्थियों ने नियुक्ति रद्द करने के फैसले का विरोध किया। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात थी।

जैसे ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा की, कई सफल अभ्यर्थी रो पड़े और धरने पर बैठ गए। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि वे अब न्याय के लिए कोर्ट जाएंगे। मंगलवार को बारिश के बीच डटे रहे।

JSSC-CGL सफल अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर मंगलवार को बारिश के बीच डटे रहे।

JSSC-CGL सफल अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर मंगलवार को बारिश के बीच डटे रहे।

इधर, हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनोद सिंह ने कहा कि नियुक्ति के बाद बिना अभ्यर्थियों का पक्ष सुने नौकरी रद्द करना न्याय के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आठ महीने तक अभ्यर्थियों को वेतन भी दिया है। ऐसे में फैसला एकपक्षीय है। अभ्यर्थियों के सामने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाने का विकल्प खुला है।

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