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पलामू में किसान मचान विधि अपनाकर सब्जियों की खेती कर रहे हैं. बांस और रस्सी से बनी मचान पर करैला जैसी फसलें उगाई जा रही हैं. इससे फल सड़ते नहीं हैं और गुणवत्ता बेहतर होती है. किसान 10 कट्ठा जमीन से 50-60 हजार रुपये तक की अच्छी कमाई कर रहे हैं.
पलामूः बदलते दौर में किसान पारंपरिक खेती से ज्यादा आधुनिक खेती कर सकते है. जो कि किसानों के लिए ज्यादा मुनाफा देता है. सब्जी की खेती में किसान अब पारंपरिक तरीकों के साथ नई तकनीकों को भी अपना रहे हैं. सब्जी खेती में मचान विधि किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है. इस विधि में बांस और रस्सी के सहारे करैला की लत्तर को जमीन से ऊपर ले जाया जाता है. इससे पौधे को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और फल भी नीचे जमीन पर पड़े रहने के बजाय ऊपर लटकते हैं.
किसान सुनील कुमार ने बताया कि वो मचान विधि से करैला समेत अन्य लत्तर वर्गीय सब्जी की फसल कर रहे है. इसके साथ वो टमाटर और अन्य लत्तर वर्गीय खेती करते है. इस विधि में फल अधिक लगते हैं और करैला जमीन के संपर्क में नहीं आता. इससे फल के खराब होने की संभावना कम रहती है. साथ ही खेत में काम करना और तैयार करैला को तोड़ना भी आसान हो जाता है.
बेल वाली सब्जियों को जमीन पर न फैलने दें
वहीं चैनपुर प्रखंड के चेडाबार की महिला किसान कुंती देवी मचान विधि अपनाकर सब्जी की खेती कर रही हैं. इस तकनीक से बेल वाली सब्जियों को जमीन पर फैलने के बजाय मचान के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है, जिससे पौधों को पर्याप्त जगह और धूप मिलती है. कुंती देवी ने बताया कि मचान विधि से फसल का उत्पादन बढ़ा है और सब्जियां भी बेहतर गुणवत्ता की हो रही हैं. जमीन पर फल नहीं रहने के कारण सब्जियों के सड़ने और खराब होने की संभावना भी कम रहती है. कम लागत में बेहतर उत्पादन मिलने से उनकी आमदनी बढ़ी है और खेती से अच्छा मुनाफा हो रहा है.
वहीं सुनील कुमार किसान ने कहा कि करीब 10 कट्ठा जमीन में करैला की खेती कर रहे हैं. यह करीब तीन महीने की फसल होती है. इस खेती में मचान तैयार करने के लिए बांस और रस्सी का इस्तेमाल किया जाता है. शुरुआत में खेत की क्यारी के चारों ओर बांस को मजबूती से खड़ा किया जाता है. इसके बाद बांस को आपस में जोड़कर ढांचा तैयार किया जाता है. इसी ढांचे पर रस्सी बांधकर करैला की लत्तर को ऊपर की ओर चढ़ाया जाता है.
लटकन विधि के तौर पर करें इस्तेमाल
मचान तैयार होने के बाद सब्जी जमीन पर फैलने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ती है. जब बेल पर फल लगते हैं तो वे मचान से नीचे की ओर लटकते हैं. इससे फल मिट्टी के संपर्क में नहीं आते और उनका आकार व गुणवत्ता बेहतर रहने की संभावना रहती है. किसान इसे लटकन विधि के तौर पर भी इस्तेमाल कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि मचान विधि में शुरुआती मेहनत जरूर होती है, लेकिन बांस और रस्सी से तैयार किया गया ढांचा पूरी फसल के दौरान काफी उपयोगी रहता है. कम लागत में बेहतर उत्पादन मिलने से यह विधि छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी लाभदायक हो सकती है. इस विधि में फसल खराब नहीं होता है.
उन्होंने कहा कि 10 कट्ठा में करैला की खेती से किसान करीब 50 से 60 हजार रुपये तक की कमाई होने की उम्मीद जता रहे हैं. उनके साथ साथ कई किसान सब्जी उत्पादन में मचान विधि को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस विधि में ज्यादा खर्च भी नहीं लगता है. इसमें दो से तीन घंटे तक मेहनत करने के बाद हो जाता है.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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