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प्रखंड की खाजुरी पंचायत के माझगड़िया गांव में बदहाल सड़क को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अनोखे तरीके से सामने आया। सड़क की जर्जर स्थिति के विरोध में ग्रामीणों ने मंगलवार को कीचड़ और पानी से भरी सड़क पर धान की रोपाई कर सांकेतिक प्रदर्शन किया। जेएलकेएम के जामताड़ा जिला सचिव अशोक घोष के नेतृत्व में ग्रामीणों ने यह शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान वर्षों पुरानी समस्या की ओर आकृष्ट कराया। ग्रामीणों के अनुसार बदहाल सड़क के कारण आवागमन जोखिम भरा हो गया है। हाल ही में गांव का एक बच्चा टोटो से गिरकर घायल हो गया था और उसके हाथ में फ्रैक्चर हुआ। परिजनों के अनुसार इलाज में करीब 30 हजार रुपये खर्च हुए। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति के कारण ऐसी घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। माझगड़िया गांव से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्टेट हाईवे गुजरता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सड़क की समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे स्टेट हाईवे पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। ग्रामीण अशोक घोष ने कहा कि यह विरोध किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है। गांव की वर्षों पुरानी बुनियादी समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आकर्षित करने का प्रयास है। उन्होंने प्रशासन से माझगड़िया गांव की सड़क का स्थल निरीक्षण कराने तथा सड़क की स्वीकृति, फंड और निर्माण की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, मरीजों की आवाजाही, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। इस सड़क से प्रतिदिन करीब एक हजार लोगों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन की ओर से ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। यहां के ग्रामीणों को पिछले 30 वर्षों से पक्की सड़क का इंतजार ग्रामीणों का कहना है कि गांव में करीब 30 वर्षों से एक भी पक्की सड़क नहीं बनी है। बारिश के मौसम में कच्ची सड़क पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर जाती है। स्थिति ऐसी हो जाती है कि सड़क और खेत में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों के पास सड़क निर्माण की मांग लेकर पहुंचे, लेकिन फंड उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उन्हें वापस कर दिया गया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि सड़क निर्माण की स्वीकृति दी गई थी तो अब तक काम क्यों शुरू नहीं हुआ।
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