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Who is Vijay Mishra? कौन हैं विजय मिश्रा, जिन्होंने 8 सालों तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी को यूपी के सुल्तानपुर कोर्ट में घसीटा? क्या यह शख्स सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए राहुल गांधी पर मुकदमा दर्ज कराया? अमित शाह पर राहुल गांधी की टिप्पणी बनी विवाद की वजह. लेकिन अदालत ने अब शिकायतकर्ता के अधिकार और सबूतों पर उठाए सवाल.
कौन हैं विजय मिश्रा, जिन्होंने राहुल गांधी को 8 सालों तक कोर्ट का चक्कर लगवाया?
Who is Vijay Mishra? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने आठ साल पुराने मानहानि मामले में बड़ी कर दिया है. यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा था. साल 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसी को विजय मिश्रा नाम का शख्स ने मुद्दा बना लिया. मिश्रा सुल्तानपुर के स्थानीय बीजेपी नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं. इस मामले में अदालत ने राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया है.कोर्ट ने फैसले में शिकायतकर्ता की कानूनी पात्रता और गवाहों के बयानों में मौजूद कमियों पर सवाल उठाए. इस तरह करीब आठ साल तक चली कानूनी लड़ाई का अंत हो गया. लेकिन सवाल यह है आखिर आठ साल मुकदमा लड़ने वाला यह विजय मिश्रा कौन है और उसको इससे क्या हासिल हुआ?
विजय मिश्रा सुल्तानपुर के बीजेपी नेता हैं. वह जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं और उस समय बीजेपी के जिला उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं. राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराने के बाद वह इस मामले में शिकायतकर्ता के रूप में सामने आए और पूरे देश में चर्चा में आ गए. उस समय विजय मिश्रा ने दावा किया था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और इससे बीजेपी तथा उसके कार्यकर्ताओं की छवि भी प्रभावित हुई. इसी आधार पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया. हालांकि, अदालत ने अपने फैसले में माना कि राहुल गांधी की टिप्पणी मुख्य रूप से अमित शाह के बारे में थी और शिकायतकर्ता ने यह साबित नहीं किया कि वह खुद इस कथित मानहानि से सीधे प्रभावित हुए थे.
किस बयान पर दर्ज हुआ था मुकदमा?
इस पूरे मामले की शुरुआत 8 मई 2018 को हुई थी. उस समय कर्नाटक विधानसभा चुनाव का प्रचार चल रहा था. बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी. शिकायत के अनुसार, राहुल गांधी ने अमित शाह का नाम सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले के संदर्भ में लिया था और उन्हें हत्या के मामले का आरोपी बताया था. अमित शाह को इस मामले में 2014 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपों से मुक्त कर दिया था. राहुल गांधी की टिप्पणी को मानहानि कारक बताते हुए विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर की अदालत में शिकायत दर्ज कराई. शुरुआत में यह मामला दीवानी अदालत में था, बाद में इसे विशेष एमपी-एमएलए अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया.
आठ साल तक कैसे चला मुकदमा?
- 4 अगस्त 2018: विजय मिश्रा ने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई.
- 27 नवंबर 2023: अदालत ने राहुल गांधी को मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया.
- 20 फरवरी 2024: राहुल गांधी अदालत में पेश हुए और उन्हें जमानत मिली.
- 20 फरवरी 2026: मामले में राहुल गांधी का बयान दर्ज किया गया.
- 26 अक्टूबर 2026: सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया.
अदालत ने राहुल गांधी को क्यों किया बरी?
अदालत के फैसले में कई अहम बातें सामने आईं. सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि क्या विजय मिश्रा इस मामले में मानहानि की शिकायत दर्ज कराने के लिए कानूनी रूप से पात्र थे? अदालत के अनुसार, कथित टिप्पणी अमित शाह के बारे में थी. विजय मिश्रा का नाम उसमें नहीं लिया गया था. वह यह भी साबित नहीं कर पाए कि अमित शाह या बीजेपी ने उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए अधिकृत किया था. अदालत ने यह भी कहा कि गवाहों के बयानों में कमियां थीं और स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह पेश नहीं किए गए.
क्या विजय मिश्रा अब ऊपरी अदालत में जाएंगे?
फैसले के बाद शिकायतकर्ता की ओर से ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही गई है. यदि अपील दायर की जाती है, तो आगे की कानूनी स्थिति उस अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी. फिलहाल सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में दोषमुक्त कर दिया है.