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कम पानी में खेती को मिलेगा पोषण, काजरी और सरकार की पहल...


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Pali News: बदलते मौसम और घटते जलस्तर के बीच खेती और खेतों की सेहत सुधारने के लिए खेत बचाओ अभियान शुरू किया गया है. इसके तहत काजरी और सरकार मिलकर मृदा संरक्षण और कम पानी में बेहतर फसल उत्पादन पर काम कर रहे हैं.

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पाली: बदलते मौसम और घटते जलस्तर के बीच अब खेती और खेतों की सेहत सुधारने के लिए सरकार ने एक बड़ी पहल की है. ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत अब जमीनों की उर्वरता बढ़ाने और मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने पर विशेष काम किया जा रहा है. इस अभियान का सबसे अहम पहलू है—मृदा की नमी का संरक्षण. वैज्ञानिकों का मानना है कि सही जल प्रबंधन के जरिए कम से कम पानी का उपयोग करके मिट्टी की नमी को फसलों तक लंबे समय तक पहुँचाया जा सकता है.

इस पूरी मुहिम में प्रसिद्ध कृषि अनुसंधान संस्थान ‘काजरी’भी सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर सहयोग कर रहा है. सरकार इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को लगातार प्रोत्साहित भी कर रही है, ताकि पारंपरिक खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाया जा सके. केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एच. आर. महला ने मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान की कृषि तकनीकों व सरकारी योजनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

जलवायु सहिष्णु किस्मों का विकास
डॉ. महला के अनुसार, मारवाड़ क्षेत्र की मुख्य खरीफ फसलें बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार और तिल हैं. इन फसलों को मौसम की अनिश्चितताओं से बचाने के लिए ‘क्लाइमेट रिजिलिएंट’ यानी जलवायु सहिष्णु किस्मों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. काजरी, कृषि विश्वविद्यालय और भारत सरकार लंबे समय से इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि कम बारिश या विपरीत परिस्थितियों में भी किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सके.

‘खेत बचाओ अभियान’ और मृदा स्वास्थ्य पर ध्यान
डॉ. महला ने केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत खेतों की मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने और उसमें आवश्यक पोषक तत्वों को बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है. इसके साथ ही, कम से कम पानी में बेहतर फसल उत्पादन के लिए ‘मृदा नमी संरक्षण’ (Soil Moisture Conservation) प्रबंधन पर भी किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.

पश्चिमी राजस्थान में जैविक और प्राकृतिक खेती का उज्ज्वल भविष्य
जैविक और प्राकृतिक खेती पर बात करते हुए डॉ. महला ने कहा कि हालांकि वर्तमान में इसका दायरा सीमित है, लेकिन पश्चिमी राजस्थान में इसका भविष्य बेहद सुनहरा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में बाजरा और मोठ जैसी फसलें पारंपरिक रूप से प्राकृतिक तरीके से उगाई जाती रही हैं. केंद्र सरकार जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहन दे रही है.

ऐसे उठा सकते किसान योजना का लाभ
किसान ‘खेत बचाओ अभियान मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और संबंधित मृदा संरक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले अपने नजदीकी कृषि सेवा केंद्र, ग्राम पंचायत कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं. इसके तहत किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाकर ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें अपनी जमीन में पोषक तत्वों की सही स्थिति और आवश्यक उर्वरकों की सटीक मात्रा की जानकारी मिलती है. इसके अलावा, किसान पोर्टल या ‘डीबीटी इन एग्रीकल्चर’ पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करके मृदा संरक्षण, जैविक/प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन और कम पानी में नमी बनाए रखने वाली आधुनिक तकनीकों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी व प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सीधा लाभ उठा सकते हैं. जिसको लेकर काजरी जोधपुर भी किसानों को जागरूक करने का काम कर रहा है.

About the Author

Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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