अटलांटा: अमेरिका में आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने बेहद कड़ा रुख सामने रखा है. सम्मेलन के पहले पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के बड़े देशों को आईना दिखाया. उन्होंने साफ कहा कि दुनिया के मौजूदा संकटों का हल कभी भी सैन्य टकराव से नहीं निकाला जा सकता है. इसके लिए हर हाल में कूटनीति और बातचीत को पूरा मौका देना होगा. विदेश मंत्री ने आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनाए जाने वाले दोहरे रवैये पर भी जोरदार प्रहार किया. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि रणनीतिक फायदों के लिए आतंकवाद के खतरे को नजरअंदाज करना बेहद भारी पड़ेगा. इसके साथ ही उन्होंने कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों और सप्लाई चेन को हथियार बनाने की खतरनाक कोशिशों पर गंभीर चिंता जताई. भारत ने साफ कर दिया कि इन संकटों की सबसे बड़ी मार गरीब और विकासशील देशों पर पड़ रही है.
‘जंग से नहीं बल्कि कूटनीति से ही निकलेगा दुनिया के मौजूदा संकटों का हल’
सत्र के दौरान विदेश मंत्री ने दुनिया भर में जारी युद्ध और तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का हल कभी भी मिसाइलों और हथियारों के दम पर नहीं खोजा जा सकता. कूटनीति को दरकिनार करके सैन्य रास्ते पर चलने से केवल तबाही और अस्थिरता ही हाथ लगेगी.
जयशंकर ने कहा, ‘वैश्विक चुनौतियों के बीच सैन्य विकल्पों से समाधान संभव नहीं है और कूटनीति को एक मौका दिया जाना चाहिए.’ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बिना देर किए शांति और बातचीत की मेज पर लौटना होगा. अगर विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता नहीं चुना गया तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह बिखर जाएगी.
समुद्री व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों की कीमत ग्लोबल साउथ क्यों चुकाए?
विदेश मंत्री ने लाल सागर और अन्य प्रमुख समुद्री रास्तों पर नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों का मुद्दा बेहद मजबूती से उठाया. उन्होंने कहा कि नागरिक जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों का सबसे ज्यादा नुकसान ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों को उठाना पड़ रहा है. इन हमलों के चलते तेल, एलएनजी, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की ढुलाई महंगी हो रही है. इससे गरीब देशों में महंगाई बेकाबू हो रही है और जरूरी सामान की भारी किल्लत पैदा हो रही है.
वैश्विक व्यापार में आ रहे असंतुलन पर भारत ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की. विदेश मंत्री ने कहा कि विदेशी बाजारों में अनियंत्रित रूप से सस्ता सामान डंप करना बेहद गलत है. कुछ देश सप्लाई चेन को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और दूसरे देशों की बाजार पहुंच को रोक रहे हैं. इस तरह की चालबाजी से विकासशील देशों के औद्योगिकीकरण के बुनियादी अधिकार को भारी नुकसान पहुंचता है.
इस खतरे से निपटने के लिए जयशंकर ने मजबूत और वैकल्पिक कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार करने पर जोर दिया. जब दुनिया के पास व्यापार के कई सुरक्षित विकल्प होंगे तब किसी एक देश पर निर्भरता का जोखिम अपने आप कम हो जाएगा.
आतंकवाद पर दोहरा रवैया अपनाने वाले मुल्कों को विदेश मंत्री ने क्या चेतावनी दी?
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि अपने तात्कालिक रणनीतिक या सामरिक हितों को साधने के लिए आतंकवाद के खतरे को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. कई मुल्क आतंकवाद की परिभाषा अपनी सुविधा के अनुसार बदलते हैं जो वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है. उन्होंने कड़े शब्दों में आगाह किया कि आतंकवाद को पालना एक बेहद जोखिम भरा खेल है. यह खेल अंत में उन मुल्कों के लिए भी उतना ही घातक साबित होता है जो इसे पनाह या बढ़ावा देते हैं.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हो रही इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को खुला रखना मुख्य एजेंडा रहा. भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है. ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास रुकावटें भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डालती हैं.
अटलांटा में जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री के अलावा क्वाड देशों के अपने समकक्षों से भी मुलाकात की. ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के साथ इस बैठक में सुरक्षित सप्लाई चेन और मुक्त समुद्री व्यापार पर चर्चा हुई. भारत ने साफ कर दिया कि दुनिया के विकास के लिए ऊर्जा और उर्वरक की निर्बाध सप्लाई सबसे बुनियादी शर्त है.