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गिरिडीह के मधुबन स्थित जुग जाहेर थान में बुधवार को मरांग बुरु की पूजा-अर्चना के साथ दो दिवसीय धर्म सम्मेलन शुरू हुआ। मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति की ओर से आयोजित सम्मेलन में झारखंड समेत छह राज्यों और नेपाल के आदिवासी प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा कर हुई। हेमंत सोरेन सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री फागू बेसरा के नेतृत्व में आदिवासी समाज के पुजारियों ने पूजा कराई। सम्मेलन में आदिवासी समाज की धार्मिक मान्यताओं, संस्कृति और परंपरागत पूजा स्थलों के संरक्षण पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि मरांग बुरु आदिवासी समाज की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। वक्ताओं ने राज्य सरकार से मरांग बुरु और आदिवासी समाज से जुड़े धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर पहल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूजा स्थलों का संरक्षण आदिवासी समाज की विरासत को बचाने से जुड़ा है। आयोजकों के मुताबिक, सम्मेलन चार और पांच नवंबर को हो रहा है। इसमें झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और नेपाल के प्रतिनिधि शामिल हैं। गुरुवार को सम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मौके पर महावीर मुर्मू, दिलीप मुर्मू, शशांक बेसरा, महेश मरांडी समेत मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति के कई पदाधिकारी और आदिवासी समाज के गणमान्य लोग मौजूद थे।
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