Gokul Dairy Elections: कोल्हापुर के मशहूर ‘गोकुल डेयरी’ (कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ) चुनाव को लेकर छिड़े सियासी संग्राम में अब दिल्ली बनाम मुंबई की तकरार देखने को मिल रही है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद तल्ख अंदाज में तंज कसा है. फडणवीस ने राहुल गांधी पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस नेता की राजनीतिक दशा ऐसी हो गई है कि वे महज 4,500 मतदाताओं वाली एक स्थानीय सहकारी संस्था के चुनाव पर दिल्ली में बैठकर ट्वीट कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘गोकुल’ के निदेशक मंडल चुनाव में किसी भी गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था; एक धड़े को 13 और दूसरे को 12 सीटें मिलीं. कोरम पूरा न होने की वजह से बैठकों को दो बार रद्द करना पड़ा, जिसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. उन्होंने कहा, “इसलिए, बैठक के लिए जरूरी कोरम (गणपूर्ति) पूरा नहीं हो पा रहा था. कोरम की कमी के कारण बैठक को दो बार रद्द करना पड़ा. अगर कोरम की कमी की वजह से बैठक तीसरी बार भी रद्द हो जाती, तो चुनाव ही रद्द हो जाता. इसीलिए सरकार ने यह फैसला लिया.”
इस फैसले की कानूनी वैधता पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए, फडणवीस ने कहा कि सरकार ने एडवोकेट जनरल की राय लेने के बाद ही यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा, “कुछ लोगों का कहना है कि यह फैसला अदालत में नहीं टिकेगा, जबकि कुछ का मानना है कि यह टिक जाएगा. यह फैसला एडवोकेट जनरल की राय लेने के बाद ही लिया गया है.” उन्होंने इस मामले में राहुल गांधी के दखल पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह कोई राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है. फडणवीस ने आगे कहा, “लेकिन यह कोई राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है. राहुल गांधी इस मामले में भी दखल दे रहे हैं.”
इससे पहले दिन में, गांधी ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में ‘गोकुल मिल्क कोऑपरेटिव’ चुनावों में बीजेपी पर चुनावी जनादेश को पलटने की कोशिश करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले पैनल द्वारा बीजेपी समर्थित ‘महायुति’ गठबंधन को हराने के बाद नियमों में बदलाव कर दिया गया. ‘X’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव के बाद नियमों को बदल दिया ताकि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बहुमत हासिल किया जा सके. उन्होंने इसे “दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी” करार दिया.
राहुल गांधी ने कहा, “गोकुल में, दूध उत्पादकों ने बीजेपी को हरा दिया है. इसलिए बीजेपी ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए – 4 डायरेक्टर और घुसा दिए, 12 को 16 कर दिया, और बहुमत हथिया लिया. यह दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी है – जनादेश में मिलावट है. बीजेपी इतनी हताश हो गई है कि सत्ता बचाने के लिए हर हद पार कर रही है. जो लोग दूध उत्पादकों के वोट चुराते हैं, वे याद रखें – किसान कभी भूलते नहीं हैं.”
यह मामला 19 अक्टूबर, 2026 को शुरू हुआ, जब ‘गोकुल मिल्क यूनियन’ के 25 डायरेक्टर पदों के लिए चुनाव हुए थे. इन चुनावों में लगभग 99.74% से 99.96% तक का चौंकाने वाला मतदान दर्ज किया गया था. वोटों की गिनती के बाद, कांग्रेस MLC सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले ‘राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी अघाड़ी’ (जिसे कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था) ने 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया. वहीं, सत्ताधारी BJP के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ गठबंधन समर्थित पैनल को बाकी 12 सीटें मिलीं.
हालांकि, इस जनादेश के बाद जल्द ही गतिरोध पैदा हो गया. अध्यक्ष चुनने की कोशिशें तब ठप पड़ गईं, जब महायुति समर्थित सभी 12 निदेशकों ने बार-बार बैठकों का बहिष्कार किया. ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि मतदान के लिए जरूरी 14 निदेशकों का कोरम (न्यूनतम उपस्थिति) पूरा न हो सके. इस समस्या के समाधान के लिए, सतेज पाटिल का पैनल बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा. मामले में दखल देते हुए, हाई कोर्ट ने सभी 25 निर्वाचित निदेशकों को नोटिस जारी किया और 10 नवंबर 2026 को अध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया.
लेकिन, अदालत द्वारा तय की गई समय-सीमा से कुछ दिन पहले ही, राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया. 4 नवंबर 2026 को, महाराष्ट्र कैबिनेट ने एक विवादास्पद अध्यादेश को मंजूरी दी. इसके तहत, राज्य सरकार उन सहकारी संस्थाओं की प्रबंध समितियों में पांच सदस्यों को नामित कर सकती है, जिनका सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपये से अधिक है. इन पांच सदस्यों में से चार को पूर्ण मतदान का अधिकार भी दिया गया है.
नियम में हुए इस अचानक बदलाव ने बोर्ड के समीकरण को पूरी तरह बदल दिया. इससे सत्ता का संतुलन कांग्रेस के 13-12 के बहुमत से बदलकर, महायुति गठबंधन के पक्ष में 16-13 के बहुमत में आ गया. कैबिनेट के इस कदम से राष्ट्रीय और राज्य स्तर के विपक्षी दलों में भारी आक्रोश फैल गया. राहुल गांधी, पवन खेड़ा और रोहित पवार जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं ने इस फैसले की कड़ी निंदा की. उन्होंने इस अध्यादेश को चुनाव के बाद मतदाताओं के जनादेश की “खुली चोरी” और सहकारी क्षेत्र की स्वायत्तता पर एक बड़ा हमला करार दिया.
इसके जवाब में, कांग्रेस पार्टी ने इस अध्यादेश को सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का संकल्प लिया. कोल्हापुर में भी इसके तुरंत असर देखने को मिले. सतेज पाटिल ने 4 नवंबर को महाराष्ट्र के सहकारी आंदोलनों के लिए एक “काला दिन” करार देते हुए, 10 नवंबर को होने वाले चुनाव से पहले दशहरा चौक से जिला कलेक्ट्रेट तक एक बड़े विरोध मार्च का आयोजन किया; वहीं, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नेताओं ने गोकुल डेयरी मुख्यालय पर स्थानीय स्तर पर घेराव करने का आह्वान किया.